- करम पूर्व संध्या समारोह में उमड़ा जनसैलाब, संस्कृति और एकता का दिखा अनुपम संगम
- करम समारोह में मंत्री चमरा लिंडा और सांसद सुखदेव भगत ने जगाई सांस्कृतिक चेतना
एबीएन न्यूज नेटवर्क, कुडू/ लोहरदगा। राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा प्रखण्ड समिति, आदिवासी छात्र संघ प्रखण्ड समिति के तत्वावधान में कुडू प्रखण्ड के नवाटोली स्थित मंगल बाजार मैदान एवं शहीद हलधर-गिरधर खेल मैदान टीको पोखरा टोली में रविवार को करम पूर्व संध्या सह मिलन समारोह धूमधाम और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।
आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता के इस महाकुंभ में हजारों लोगों की सहभागिता ने पूरे क्षेत्र को उत्सवी माहौल में सराबोर कर दिया। मंगल बाजार मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री चमरा लिंडा, लोहरदगा लोकसभा के माननीय सांसद सह छत्तीसगढ़ के प्रभारी सुखदेव भगत मुख्य रूप में उपस्थित थे।
अतिथियों का मांदर की थाप, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और सांस्कृतिक नृत्य के साथ भव्य स्वागत किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि करम पर्व आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, प्रकृति प्रेम और सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने का आह्वान किया।
सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का सच्चा पुजारी रहा है और उसकी संस्कृति जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण का संदेश देती है। उन्होंने युवाओं से नशापान जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि नशा समाज और परिवार दोनों को कमजोर करता है।
उन्होंने समाज की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने तथा नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने, शिक्षा, सामाजिक समरसता और संगठन की शक्ति पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न खोड़हा दलों ने पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मांदर और नगाड़ों की गूंज के बीच देर शाम तक उत्सव का माहौल बना रहा। लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर करम पर्व की सांस्कृतिक गरिमा को जीवंत रूप प्रदान किया। मौके पर आलोक साहु, पूर्व जिला अध्यक्ष रीना भगत, विकास लाल, विक्की खान, मुखिया सुष्मा देवी, ललिता उरांव समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, युवा एवं ग्रामीण उपस्थित थे।
समारोह के सफल आयोजन में शंकर उरांव, राहुल उरांव, बिरसा उरांव, सुशील उरांव, विनय कुजूर, अर्जुन उरांव, रमेश उरांव, शनिदेव भगत, रूपनारायण उरांव, चामु भगत, शिवु उरांव, रामदयाल उरांव, खदीश्वर उरांव, राजकिशोर उरांव, फल्गु उरांव, सुनील उरांव, जलेश्वर उरांव, वीर उरांव, नेमरा उरांव, सुदर्शन उरांव, केशर उरांव, बिसुन उरांव, सरोज उरांव, जगरनाथ उरांव, तेजनाथ उरांव, सोमरा उरांव, बुढ़न उरांव, गनपत उरांव, बलदेव उरांव, रतन उरांव, गजरा उरांव, सुकरा उरांव सहित आयोजन समिति के सभी पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।