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पाँच दिन बाद सदर अस्पताल से डिस्चार्ज हुए देवेन्द्र नाथ महतो

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पाँच दिन बाद सदर अस्पताल से डिस्चार्ज हुए देवेन्द्र नाथ महतो
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  • पाँच दिन बाद सदर अस्पताल से डिस्चार्ज हुए देवेन्द्र नाथ महतो 
  • कहा— शरीर थक चुका है, लेकिन छात्रों के भविष्य की लड़ाई कमजोर नहीं पड़नी चाहिए

टीम एबीएन, रांची। JPSC-JSSC में निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग को लेकर लंबे समय से सत्याग्रह, धरना, भूख हड़ताल, विधानसभा घेराव एवं 24 जिला भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा जैसे आंदोलनों का नेतृत्व कर रहे देवेन्द्र नाथ महतो को स्वास्थ्य में गंभीर कमजोरी के कारण 13 सितंबर 2026 को सदर अस्पताल, रांची में भर्ती कराया गया था। पाँच दिनों तक चिकित्सकीय निगरानी एवं उपचार के बाद आज 17 सितंबर 2026 को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

चिकित्सकों के निर्देश के अनुसार लंबे समय तक नियमित खान-पान एवं पर्याप्त आराम नहीं मिलने के कारण उनके शरीर में अत्यधिक थकान और कमजोरी उत्पन्न हुई है। शरीर को आवश्यक पोषक तत्वों, विटामिन एवं मिनरल्स की कमी के साथ-साथ लिवर फंक्शन एवं पाचन तंत्र को पर्याप्त सपोर्ट नहीं मिल पाने के कारण उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

चिकित्सकों ने नियमित उपचार, पर्याप्त आराम एवं समय पर संतुलित खान-पान का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है। कैल्शियम एवं विटामिन-D की कमी के कारण नसों एवं मांसपेशियों में जकड़न और खिंचाव की समस्या भी बताई गई है। विशेष रूप से दाहिने पैर, दाहिनी पीठ एवं दाहिने कंधे में जकड़न और खिंचाव की शिकायत बनी हुई है। 

अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि अभी भी शरीर में काफी कमजोरी है। फिलहाल मैं मुख्य रूप से खिचड़ी जैसे हल्के भोजन पर हूँ और अन्य भोजन लेने पर पाचन में परेशानी हो रही है। डॉक्टरों ने नियमित उपचार, आराम और खान-पान को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। मैं चिकित्सकों के निर्देशों का पूरी तरह पालन करूंगा और आवश्यकता पड़ने पर पुनः चिकित्सकों से परामर्श लूंगा।

देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि लंबे समय से छात्रों, अभ्यर्थियों और झारखंड के आदिवासी-मूलवासी, गरीब, किसान-मजदूर परिवारों के बच्चों के भविष्य और उनके हक-अधिकार के लिए संघर्ष करते-करते मेरा शरीर थक चुका है और बीमारी ने मुझे घेर लिया है। लेकिन अस्पताल के बिस्तर पर रहते हुए भी मेरे मन में लगातार यही चिंता बनी रही कि छात्रों के भविष्य और उनके अधिकार की लड़ाई कमजोर नहीं पड़नी चाहिए।

साथ ही उन्होंने आगे कहा कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए छात्रों एवं अभ्यर्थियों का संघर्ष हर कठिन परिस्थिति में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी चिकित्सकीय निर्देशों का पालन करते हुए वे आगे की दिशा में आवश्यक कदम उठाएंगे।

देवेन्द्र नाथ महतो ने यह भी कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का संघर्ष नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं और अभ्यर्थियों के भविष्य का सवाल है जो अपनी मेहनत और योग्यता के आधार पर निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था की उम्मीद रखते हैं।

अंत में उन्होंने अपने स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना, दुआ और शुभकामनाएं देने वाले झारखंडवासियों, छात्रों-छात्राओं, अभ्यर्थियों, माताओं-बहनों, युवाओं, साथियों एवं सभी शुभचिंतकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

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