- हाई कोर्ट में सरकार द्वारा ऐफिडेविट दाखिल नहीं करने के बाद देवेन्द्र नाथ महतो का प्रतिक्रिया
- जेएसएससी-सीजीएल की हेराफेरी में लीपापोती से देवेंद्रनाथ महतो नाराज
- हाईकोर्ट में सरकार ने फिर नहीं दाखिल किया एफिडेविट, दो दिन का समय और लिया— सरकार के टालमटोल रवैये पर देवेन्द्र नाथ महतो ने उठाये सवाल
- सरकार को टालमटोल की नीति छोड़कर न्यायालय के समक्ष स्पष्ट, तथ्यात्मक और जवाबदेह स्थिति रखनी चाहिए : देवेन्द्र नाथ महतो
एबीएन कैरियर डेस्क। जेएसएससी-सीजीएल भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान के प्रमुख आंदोलनकारी छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो ने आज हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार के रवैये पर कड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आज की सुनवाई में सरकार की ओर से अपेक्षित शपथ-पत्र दाखिल नहीं किया गया। सरकार ने पुन: समय की मांग की, जिस पर माननीय हाईकोर्ट ने सरकार को दो दिनों का समय प्रदान किया है।
देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि जब सरकार लगातार सीआईडी जांच की बात कर रही है और जांच में लगातार अनियमितताओं के तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है, तो आखिर सरकार न्यायालय के समक्ष अपना स्पष्ट स्टेंड, फ्रेक्चुल स्टैटस और जांच की प्रगति दर्शाने वाला एफिडेविट दाखिल करने में लगातार विलंब क्यों कर रही है?
उन्होंने कहा कि सरकार को अब टालमटोल की नीति छोड़कर न्यायालय के समक्ष स्पष्ट, तथ्यात्मक और जवाबदेह स्थिति रखनी चाहिए। छात्रों को केवल सीआईडी जाँच के नाम पर आश्वासन नहीं, बल्कि न्यायालय के समक्ष सरकार का स्पष्ट निर्णय और कार्रवाई चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार कहीं फ्रेंडली गेम खेलते हुए दो नावों पर सवार रहने की कोशिश तो नहीं कर रही है? एक तरफ सीआईडी जांच की बात और दूसरी तरफ निर्णायक कार्रवाई से बचने की कोशिश—छात्र सरकार के इस रवैये को समझ रहे हैं।
24 जिलों की यात्रा ने आंदोलन को कोने-कोने तक पहुंचाया
देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा कि सरकार यह भ्रम न पाले कि छात्रों का जोश कमजोर हो गया है। जयपाल सिंह मुंडा आंदोलन, विधानसभा घेराव, सत्याग्रह और अनशन के दौरान जो संघर्ष और ऊर्जा दिखायी गयी थी, वह आज भी बरकरार है। 24 जिला भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा ने इस आंदोलन को झारखंड के कोने-कोने तक पहुंचा दिया है।
यात्रा के दौरान छात्रों, अभिभावकों और आम जनता से मिले व्यापक समर्थन ने स्पष्ट कर दिया है कि पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचारमुक्त भर्ती व्यवस्था अब पूरे झारखंड के युवाओं की आवाज बन चुकी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि हाईकोर्ट द्वारा दिए गए समय के भीतर ऐफिडेविट दाखिल कर अपना स्पष्ट पक्ष न्यायालय के समक्ष रखे, सीआईडी जांच की वास्तविक स्थिति एवं निष्कर्षों को न्यायालय के संज्ञान में लाए और विवादित भर्ती प्रक्रियाओं पर विधिसम्मत एवं ठोस कार्रवाई करे।
स्वास्थ्य बिगड़ने के बावजूद संघर्ष की आवाज जारी
देवेन्द्र नाथ महतो ने बताया कि लगातार आंदोलन, अनशन और 24 जिलों की भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने के कारण वे फिलहाल सदर अस्पताल में भर्ती हैं और आज तीसरे दिन भी उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें नियमित चिकित्सकीय उपचार, पर्याप्त आराम तथा संतुलित खान-पान की आवश्यकता है।
चिकित्सकीय निगरानी में यह भी बताया गया है कि फिलहाल उनका पाचन तंत्र एवं लीवर फंक्शन पर्याप्त रूप से सपोर्ट नहीं कर पा रहा है, इसलिए शरीर को आवश्यक आराम और चिकित्सकीय देखरेख की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति के बावजूद छात्रों और युवाओं के अधिकार की लड़ाई के प्रति उनका संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।
छात्रों के धैर्य की परीक्षा न ले सरकार
देवेन्द्र नाथ महतो ने स्पष्ट कहा कि सरकार छात्रों की आंखों में धूल झोंकने और बार-बार समय लेने की नीति बंद करे। छात्रों को आश्वासन नहीं, न्याय चाहिए; सीआईडी जांच के नाम पर अनिश्चितता नहीं, बल्कि न्यायालय के समक्ष स्पष्ट तथ्य और ठोस कार्रवाई चाहिए।
सरकार जल्द से जल्द अपने निर्णय को न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखे और छात्रों के हित में निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था सुनिश्चित करे। अन्यथा आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से चक्का जाम जैसे आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए छात्र मजबूर होंगे।