*प्रेस रिलीज*
*दिगंबर जैन भवन, राँची*
- पर्युषण महापर्व के सप्तम दिवस भक्ति, तपस्या और आत्मबल का संदेश
टीम एबीएन, रांची। पर्युषण महापर्व के सप्तम दिवस को भक्ति दिवसके रूप में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। श्री साधुमार्गी जैन संघ, रांची द्वारा आयोजित आज के कार्यक्रम में श्रीमती ज्योति जी ओस्तवाल ने अंतःगढ़ सूत्र का वांचन किया। इसके पश्चात स्वाध्यायी श्रीमती पुष्पा जी ओस्तवाल ने अपने प्रेरक प्रवचन में तपस्या, त्याग, संयम और धार्मिक जीवन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला
उन्होंने कहा कि जीवन में छोटी से छोटी तपस्या और छोटे से छोटा त्याग भी अवश्य होना चाहिए। यदि कठोर तपस्या करना संभव न हो तो व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार छोटी तपस्या अवश्य करे। तपस्या से व्यक्ति का आत्मबल, शारीरिक बल और मनोबल तीनों मजबूत होते हैं। इसके विपरीत आलस्य और प्रमाद से भरा जीवन व्यक्ति की आंतरिक शक्ति को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि तपस्या का मूल उद्देश्य आत्मिक उन्नति और कर्मों की निर्जरा है।
स्वाध्यायी जी ने श्रावक-श्राविकाओं के बारह व्रतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन व्रतों का श्रद्धा और निष्ठा से पालन आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि तपश्चर्या से आत्मिक उन्नति होती है और उसके सकारात्मक प्रभाव जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी दिखाई देते हैं।
जैन धर्म के चार प्रमुख स्तंभ साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका हैं। इन चारों में से किसी एक स्तंभ के कमजोर होने पर धर्म की मजबूती भी प्रभावित होती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका को समझते हुए धर्म, संयम और साधना के प्रति सजग रहना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में रामामृतम ध्यान कराया गया। इसके पश्चात सामूहिक गुरु वंदना की गई तथा स्वाध्यायी जी द्वारा मांगलिक सुनाया गया।
इस महापर्व के दौरान समाज में अनेक तपस्याएं भी गतिमान हैं। विशाल दसानी, पायल कोठारी एवं पूजा बोहरा की तपस्या जारी है। इनके अलावा भी समाज के अनेक श्रावक-श्राविकाएं विभिन्न प्रकार की तप-साधना में संलग्न हैं।
कल पर्युषण पर्व के अंतिम दिन मे समाज के लोगों के द्वारा अपने कर्मों की निर्जरा हेतु दिन भर धार्मिक अनुष्ठान एवं उपवास आदि रखा जायेगा, शाम मे 6 बजे से सामूहिक प्रतिक्रमण हैं।
कार्यक्रम का संचालन राजेश पींचा ने किया।आज के कार्यक्रम मे मुख्य रूप से मूलचंद सुराणा, जय जैन पींचा, राकेश बच्छावत, घेवरचंद जी नाहटा, सुमन बरमेचा, चेतन दास बोहरा सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। उक्त जानकारी उत्तम जैन ने दी।