झारखंड में अवैध खनन पर अफसरों की सुस्ती
शिकायतों पर भी नहीं हो रही कार्रवाई; धनबाद सबसे आगे
टीम एबीएन, रांची/धनबाद। झारखंड में अवैध खनन और कोयले के अवैध परिवहन पर रोक लगाने के सरकारी दावों के बीच अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। खान एवं भूतत्व विभाग की समीक्षा में सामने आया है कि जिलों में अवैध खनन से जुड़ी शिकायतें तो लगातार पहुंच रही हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई की रफ्तार काफी धीमी है। कार्रवाई के अभाव में अवैध खनन करने वालों का मनोबल बढ़ने की बात भी सामने आई है।
धनबाद से सबसे ज्यादा शिकायतें
विभागीय समीक्षा के अनुसार, धनबाद ऐसा जिला है जहां अवैध खनन एवं अवैध परिवहन से संबंधित सबसे अधिक शिकायतें सामने आई हैं। उपलब्ध आंकड़ों में धनबाद में 87 शिकायतें दर्ज होने और 20 मामलों में कार्रवाई होने की बात कही गई है।
इसके बाद पाकुड़, गिरिडीह और साहिबगंज जैसे जिलों से भी बड़ी संख्या में शिकायतें पहुंची हैं। सबसे गंभीर स्थिति साहिबगंज की बताई गई है, जहां दर्ज 55 शिकायतों के मुकाबले कार्रवाई का आंकड़ा शून्य है।अवैध खनन के कारण धनबाद और आसपास के कोयलांचल क्षेत्रों में जमीन धंसने, गोफ बनने और लोगों के उसमें समा जाने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। इसके बावजूद शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
575 शिकायतों में 269 पर कार्रवाई का दावा
विभागीय समीक्षा में बताया गया कि पिछले एक वर्ष में अवैध खनन एवं परिवहन से संबंधित 575 शिकायतें जिलों तक पहुंचीं, जिनमें से 269 मामलों में कार्रवाई की गई, जबकि 306 मामलों में जिला स्तर पर कार्रवाई लंबित रही। हालांकि, विभाग की विस्तृत जिला-वार तालिका में कुल आंकड़ा 593 शिकायतें और 271 मामलों में कार्रवाई का दिया गया है। यानी उपलब्ध आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है, जिसे विभागीय स्तर पर स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
अगस्त में 13 जिलों ने टास्क फोर्स की बैठक की जानकारी नहीं दी
अवैध खनन पर कार्रवाई के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया गया है। व्यवस्था के तहत प्रत्येक जिले को हर महीने बैठक कर उसकी कार्यवाही और मिनट्स की जानकारी संबंधित पोर्टल पर अपलोड करनी होती है।लेकिन अगस्त महीने में 13 जिलों से जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक से संबंधित कोई जानकारी अपलोड नहीं की गई। इससे भी अधिकारियों की सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
धनबाद में अवैध खनन बना जानलेवा खतरा
धनबाद में अवैध खनन का मामला केवल सरकारी राजस्व के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है। कोयला निकालने के लिए छोड़े गए अथवा अवैध रूप से संचालित खनन क्षेत्रों में जमीन कमजोर होने के कारण अचानक धंसान और गोफ बनने की घटनाएं होती हैं।
रविवार को भी धनबाद में अवैध खनन से जुड़ी घटना में लोगों के हताहत होने की सूचना सामने आई। ऐसी घटनाओं के बाद कुछ समय के लिए कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन बाद में अवैध गतिविधियां फिर शुरू होने के आरोप लगते रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक अवैध खनन के स्रोतों पर स्थायी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हादसों का खतरा बना रहेगा।
केवल कागजी कार्रवाई से नहीं रुकेगा अवैध खनन
अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए पुलिस, प्रशासन, खनन विभाग और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई या अवैध खनन स्थल को बंद कर देना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि अवैध खनन में शामिल लोगों की पहचान, एफआईआर, खनन स्थलों की नियमित निगरानी और अवैध परिवहन पर प्रभावी कार्रवाई लगातार जारी रहे।
धनबाद जैसे कोयला क्षेत्रों में जहां लंबे समय से अवैध खनन की समस्या बनी हुई है, वहां प्रशासनिक कार्रवाई के साथ स्थानीय लोगों को भी जागरूक करना जरूरी है। जब तक अवैध खनन के खिलाफ लगातार और सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हादसों का खतरा और सरकारी व्यवस्था पर सवाल दोनों बने रहेंगे।