जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक का खुलासा : 15 अभ्यर्थियों से वसूले 1.80 करोड़, नेपाल-बोकारो के होटलों में रटवाये 120 सवाल
टीम एबीएन, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (सीजीएल) परीक्षा में पेपर लीक मामले में रोज नये-नये खुलासे हो रहे हैं। इसकी जांच कर रही सीआईडी ने बड़े नेटवर्क का पदार्फाश किया है। आयोग ने सितंबर, 2024 में इस परीक्षा का आयोजन किया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, जालसाजों ने परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को नेपाल के विराटनगर और बोकारो के होटलों में रखकर 120 सवाल और उनके जवाब रटवाये थे। इस पूरे खेल में सिंडिकेट ने अभ्यर्थियों से 12 लाख रुपये से लेकर 70 लाख रुपये तक की भारी रकम वसूली थी।
महज 15 अभ्यर्थियों से 1.80 करोड़ रुपये वसूले
सीआईडी ने मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी लगभग 350 अभ्यर्थियों और संबंधित लोगों से पूछताछ कर चुकी है। पड़ताल में खुलासा हुआ है कि गिरोह ने महज 15 अभ्यर्थियों से करीब 1.80 करोड़ रुपये वसूले थे। मामले की दिशा टीडीपीएल के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद बदली। आरोपी अभय तिवारी ने फर्जीवाड़े के जरिये खुद भी परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल की थी। सीआईडी ने उसकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी को भी अनुचित तरीके से परीक्षा पास करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।
सीआईडी की टीम ने नामकुम स्थित आयोग मुख्यालय में छापेमारी कर ओएमआर शीट, डिजिटल साक्ष्य और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किये।अधिकारियों ने आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से भी लंबी पूछताछ की। जांच में साक्ष्य मिलने के बाद राज्य सरकार ने टीडीपीएल एजेंसी द्वारा संचालित परीक्षाओं के परिणामों पर रोक लगा दी और 22 परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी की।
उधर प्रश्नपत्र छपाई से जुड़ी वेबेल कंपनी के संचालक मिथिलेश सिंह, राकेश सिंह और उमाकांत प्रामाणिक फरार हैं। सीआईडी उनकी गिरफ्तारी के लिए पटना तथा दिल्ली में लगातार छापेमारी कर रही है। सीआईडी ने मिथिलेश सिंह की अनुबंधित निजी एजेंसी आईसीएन के दो कर्मचारियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।
नेपाल में अभ्यर्थियों के ठहरने का इंतजाम करने वाले एजेंटों राम प्रवेश यादव, रघुवीर यादव, संदीप त्रिपाठी, अनीश कुमार और विनय शाह की तलाश जारी है। सीआईडी प्रतिदिन 20 अभ्यर्थियों को समन भेजकर उनके बयान दर्ज कर रही है। जांच अधिकारी कॉल डिटेल रिकॉर्ड और कागजातों को खंगालकर सिंडिकेट की पूरी कड़ियां जोड़ने में लगे हैं।