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जिला राजी पड़हा व्यवस्था को अनदेखा कर पेसा कानून एवं ग्राम सभा चयन में अनियमितता का आरोप

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जिला राजी पड़हा व्यवस्था को अनदेखा कर पेसा कानून एवं ग्राम सभा चयन में अनियमितता का आरोप
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एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा जिला प्रशासन द्वारा जिला राजी पड़हा व्यवस्था को अनदेखा करते हुए पत्रांक 379, दिनांक 10.06.2026 के माध्यम से जारी सूची तथा पेसा कानून के तहत ग्राम सभा के चयन/ गठन की प्रक्रिया में कथित अनियमितता के संबंध में आदिवासी संगठनों ने आज दिनांक 08.09.2026 को उपायुक्त, लोहरदगा को मांग-पत्र सौंपकर पूरे मामले से अवगत कराया। 

आदिवासी संगठनों का कहना है कि लोहरदगा जिले में आदिवासी समाज की पारंपरिक सामाजिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के रूप में जिला राजी पड़हा व्यवस्था लंबे समय से अस्तित्व में है। इसके बावजूद ग्राम सभा एवं ढएरअ से संबंधित प्रक्रिया में इस पारंपरिक व्यवस्था की भूमिका और स्थानीय सामाजिक संरचना को नजरअंदाज किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। 

संगठनों ने मांग की है कि प्रशासन द्वारा जारी पत्रांक 379 दिनांक 10.06.2026 के आधार पर तैयार सूची एवं उसके तहत की गयी पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित ग्राम सभाओं के चयन/गठन में किन नियमों, प्रावधानों एवं प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। 
आदिवासी संगठनों ने उपायुक्त महोदय से मांग की है कि  

  • पत्रांक 379 दिनांक 10.06.2026 के आधार पर जारी सूची एवं उससे संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया की जांच कराई जाए। 
  • पेसा कानून के प्रावधानों के अनुरूप ग्राम सभा की प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा की जाए। 
  • ग्राम सभा के गठन/चयन में रूढ़ी जन्य पारंपरिक ग्राम व्यवस्था एवं स्थानीय आदिवासी सामाजिक संरचना की भूमिका को स्पष्ट किया जाए। 
  • जिला राजी पड़हा व्यवस्था को अनदेखा किए जाने के कारणों को सार्वजनिक किया जाए। 
  • यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित प्रक्रिया/सूची को निरस्त कर नियमानुसार पुन: प्रक्रिया शुरू की जाए। 
  • भविष्य में पेसा एवं ग्राम सभा से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में स्थानीय आदिवासी समाज की संवैधानिक एवं पारंपरिक रूढ़ी जन्य व्यवस्थाओं की उपेक्षा न की जाए। 

संगठनों ने कहा कि ढएरअ कानून आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा को अधिकार एवं भागीदारी प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इसलिए ग्राम सभा से संबंधित किसी भी प्रक्रिया को केवल प्रशासनिक औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि स्थानीय समुदाय की वास्तविक भागीदारी और अधिकारों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए। 

आदिवासी संगठनों ने उपायुक्त से मांग की है कि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कराकर स्थिति स्पष्ट की जाए और संबंधित पक्षों को इसकी जानकारी दी जाए। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर समयबद्ध एवं संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई, तो लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आगे की कार्रवाई करने पर विचार किया जाएगा।

 इस अवसर पर जिला राजी पडहा व्यवस्था के वेल लक्ष्मी नारायण भगत,जिला राजी सरना प्रार्थना सभा के अध्यक्ष सोमदेव उरांव,आदिवासी समन्वय के अध्यक्ष अरविंद उरांव, सोमे उरांव, वन्दे उरांव, बुधेश्वर उरांव, नारायण उरांव, वीरेंद्र उरांव, जोंक वेल मंजन उरांव, राजु उरांव , गोसाई उरांव आदि ग्रामीण उपस्थित थे।

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