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धनबाद : भं-धंसान में मृत मासूम की मुआवजा को लेकर बीसीसीएल कार्यालय के बाहर प्रदर्शन

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धनबाद : भं-धंसान में मृत मासूम की मुआवजा को लेकर बीसीसीएल कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
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  • भू-धंसान ने छीनी मासूम की जिंदगी, अब 30 लाख मुआवजे की मांग को लेकर बीसीसीएल कार्यालय के बाहर प्रदर्शन 
  • सिजुआ के तीन पटिया टोला में मातम और दहशत का माहौल, बेघर हुए परिवार स्टेडियम के बरामदे में रहने को मजबूर 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद/कतरास। धनबाद के कोयलांचल में भू-धंसान का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। सिजुआ मोड़ स्थित तीन पटिया टोला में मंगलवार को हुए भीषण भू-धंसान ने एक मासूम बच्चे की जिंदगी छीन ली। अब इस दर्दनाक हादसे के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का आक्रोश फूट पड़ा है। 

बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद मृत बच्चे के परिजन बीसीसीएल एरिया-5 कार्यालय के समक्ष पहुंच गये और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजन मृतक के आश्रित परिवार को 30 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग पर अड़े हुए हैं। तीन पटिया टोला में हुए भू-धंसान की भयावहता ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। घटनास्थल के समीप लगा बिजली का तार और एक विशाल पीपल का पेड़ जमीन के साथ करीब 10 फीट नीचे धंस गया। 

इस भयावह दृश्य को देखकर आसपास के लोगों में डर है कि जमीन के नीचे की स्थिति अभी भी बेहद खतरनाक हो सकती है। लोगों को आशंका सता रही है कि कहीं फिर से जमीन न धंस जाए और कोई दूसरा बड़ा हादसा न हो जाए। हादसे के बाद प्रभावित परिवारों को उनके घरों से हटाकर सिजुआ स्टेडियम के बरामदे में अस्थायी रूप से ठहराया गया है। बताया जा रहा है कि परिवार पर्दे लगाकर बरामदे में रहने को मजबूर हैं। 

एक तरफ लोगों ने अपना आशियाना छोड़ा, तो दूसरी तरफ अब उनके सामने भविष्य और स्थायी ठिकाने का संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित परिवारों का सवाल है कि आखिर वे कब तक इस तरह अस्थायी व्यवस्था में जीवन गुजारेंगे? मृतक बच्चे के परिजन और स्थानीय लोग बीसीसीएल प्रबंधन के समक्ष कई मांगें रख रहे हैं— 

  • मृतक के आश्रित परिवार को 30 लाख रुपये मुआवजा दिया जाये। 
  • भू-धंसान प्रभावित सभी परिवारों का सुरक्षित स्थान पर स्थायी पुनर्वास किया जाये। 
  • प्रभावित इलाके की तत्काल वैज्ञानिक जांच कराई जाये। 
  • खतरे वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाये। 
  • आखिर कब खत्म होगा भू-धंसान का यह सिलसिला? 
  • स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से भू-धंसान की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन प्रभावित लोगों की सुरक्षा और स्थायी पुनर्वास को लेकर अपेक्षित ठोस कदम नहीं उठाये गये। 
  • एक मासूम की मौत के बाद अब सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा और भविष्य का है। 

आखिर कब तक कोयलांचल के लोग डर के साये में जीने को मजबूर रहेंगे? कब तक धरती धंसती रहेगी और लोगों के आशियाने उजड़ते रहेंगे? और क्या एक और बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? अब सभी की निगाहें प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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