पेंशनरों में वित्त अधिनियम 2025 के वैलिडेशन कानून को लेकर आक्रोश, सांसद सुखदेव भगत को सौंपा ज्ञापन
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। झारखंड राज्य पेंशनर समाज, जिला शाखा- लोहरदगा का एक प्रतिनिधिमंडल मैना बगीचा नदिया उच्च विद्यालय के प्रांगण से एक जुलूस निकालकर लोकसभा सांसद सुखदेव भगत आवास पहुंचे और उन्हें ज्ञापन समर्पित कर माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नयी दिल्ली से सुप्रीम कोर्ट के न्यायादेश के आलोक में पूर्व की भांति समानता बनाये रखते हुए (दिनांक 25 मार्च 2025) को कैबिनेट एवं लोकसभा से बिना बहस एवं मनमाने ढंग से पुराना पेंशनर एवं नया पेंशनर कह कर पेशनरों को गलत ढंग से बांटने का कानून पारित किये गये वैलीडेशन एक्ट, जिस के विरूद्ध कोई पेंशनर कोर्ट भी नहीं जा सकता है) को खत्म करने, माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम 2007, विधवा बहु को पेंशन में अधिमानता, परित्यक्ता एवं विधवा पुत्री को पेंशन में अधिकार, मंहगाई के मद्देनजर वेतन का आधा पेंशन हो जाने के कारण मंहगाई राहत सूचकांक निर्धारित करने, कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय संबंधी विभागीय संसदीय समिति के 10 दिसंबर 2021 की 11वीं रिपोर्ट के अनुसार सेवानिवृत्ति के 65 वर्ष से 5%, 70 वर्ष से 10%, 75 वर्ष से 15% अतिरिक्त पेंशन लागू करने, 40% बेचे गये पेंशन की कटौती मात्र 10 वर्ष 8 महीना में हो जाने के कारण उसे सिर्फ 11 वर्ष तक कटौती करने, पेंशनरों को आयकर की कटौती से मुक्त करने, कोरोना काल के 18 महीना का लंबित डी ए का सूद सहित भुगतान, रेल यात्रा में पूर्व की भांति छूट, आठवां वेतन आयोग के टीओआर (टर्म्स आफ रेफरेंस) को खत्म करने और बाह्य (ओपी) एवं आंतरिक (आईपी) इलाज में कैशलेस सुविधा देने संबंधी अनुरोध के साथ ज्ञापन समर्पित किया गया।
सांसद ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि हमारे पेंशनर समाज के बुजुर्गों ने अपना पूरा जीवन देश एवं राज्य की सेवा में दिया है। उनकी पेंशन उनका हक है भीख नहीं। वित्त अधिनियम 2025 के वैलिडेशन क्लोज को लेकर चिंता आप लोगों ने जो जतायी है वह गंभीर है इस मामले को मैं पूरी गंभीरता से लोकसभा में उठाऊंगा तथा प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र प्रेषित करूंगा ताकि पेंशनर और उनके परिवारों को न्याय मिले।
ज्ञापन समर्पण कार्यक्रम में महेश कुमार सिंह जिलासचिव सह महासचिव, चंद्रकांत सिंह राष्ट्रीय वा. चेयरमैन, मोहन मिंज, मो जफर आलम, किसुन दास, घुरती उरांव, जयगोविंद साहू, बीरसो उरांव, वरदानी वेक कच्छप, देवमुनि कुजूर, आशामनि लकड़ा, मंजू तिग्गा, जानकी देवी, तारामनी देवी, ज्योति नाग, मेझरन कुजूर, ज्योति नाग, जतरी उरांव आदि काफी संख्या में पेंशनर शामिल थे।