टीम एबीएन, रांची। टेरर फंडिंग मामले में आधुनिक पावर कंपनी के एमडी महेश अग्रवाल, वीकेवी कंपनी के ट्रांसपोटर्स अमित अग्रवाल उर्फ सोनू अग्रवाल एवं विनीत अग्रवाल को झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने इनकी ओर से दाखिल क्वैसिंग याचिकाओं को खारिज कर दिया है। अर्थात् तीनों को आगे भी मुकदमा का सामना करना पड़ेगा। याचिका 4 फरवरी 2020 को दाखिल की गई थी। पूर्व में बहस पूरी होने के बाद खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अग्रवाल बंधुओं की ओर से एनआइए कोर्ट द्वारा इनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर लिए गए संज्ञान के खिलाफ हाईकोर्ट में क्वैसिंग याचिका दाखिल की गई थी। तीनों पर उग्रवादी संगठन को फंडिंग देने का आरोप है। एनआइए ने तीनों के खिलाफ जांच पूरी करते हुए 15 जनवरी 2020 को पूरक चार्जशीट दाखिल की थी। जिस पर विशेष अदालत ने संज्ञान लिया था। अब इनके पास सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने का विकल्प है। गौरतलब है कि सीसीएल, पुलिस, उग्रवादी और शांति समिति के बीच समन्वय बैठाने की आड़ में मोटी रकम लेवी के रूप में वसूली जाती थी। एनआइए ने टंडवा थाने में दर्ज प्राथमिकी (कांड संख्या 2/2016) को टेक ओवर करते हुए कांड संख्या 3/2018 दर्ज किया है।
क्या है मामला : एनआइए की जांच में तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) को फंड देने कि पुष्टि हुई है। टीपीसी को लेवी देने के लिए ही ऊंची दर पर मगध और आम्रपाली प्रोजेक्ट से कोयला ढुलाई का ठेका लिया जाता था। ऊंची दर पर ली गई राशि का अधिकतर हिस्सा टीपीसी को जाता था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला
बहस के दौरान सुदेश केडिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया। कहा गया कि इनके खिलाफ प्रथम दृष्टया का कोई मामला नहीं बनता है। इसको देखते हुए एनआइए कोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान को खारिज करते हुए उन्हें राहत दी जानी चाहिए। इनलोगों का नाम पूरक चार्जशीट में शामिल किया गया था।