दिल्ली में आदिवासी महासभा के 32वें विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए सांसद सुखदेव भगत
एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली में आदिवासी महासभा ने 32वां विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। कार्यक्रम में लोहरदगा लोकसभा के सांसद सुखदेव भगत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर सांसद श्री भगत का आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा, नगाड़े-ढोल और झूमर नृत्य के साथ भव्य स्वागत किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद श्री भगत ने विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, आज का दिन हमारी अस्मिता, हमारी संस्कृति और हमारे पूर्वजों के संघर्ष को याद करने का दिन है। हम आदिवासी इस देश के मूल वासी हैं। हमारी पहचान जल, जंगल और जमीन से है।
उन्होंने केंद्र सरकार से दिल्ली में रहने वाले आदिवासियों को एसटी का दर्जा देने की मांग की। कहा, दिल्ली में रह रहे हजारों आदिवासी भाई-बहन आज भी अपनी भाषा, रीति-रिवाज और संस्कृति को जीवित रखे हुए हैं। दिल्ली में रहने से उनकी आदिवासी पहचान खत्म नहीं होती। उन्हें संविधान में मिले एसटी के सभी अधिकार तुरंत दिये जायें।
सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार जनगणना कॉलम में सरना धर्म कोड़ शामिल करें। हम प्रकृति पूजक हैं। सरना हमारा धर्म है। जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड का कॉलम बनना चाहिए ताकि हमारी धार्मिक पहचान सुरक्षित रहे। श्री भगत ने जल-जंगल-जमीनके रक्षा के लिए हमारे पूर्वजों ने अपनी कुबार्नी दी है। पेसा कानून और 5वीं अनुसूची को पूरी तरह लागू किया जाए।
आदिवासी क्षेत्रों में खनिज, जंगल और जमीन पर पहला अधिकार आदिवासी का ही हो। इसके साथ ही उन्होंने आदिवासियों के पारंपरिक रीति-रिवाज, भाषा, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षणकी बात भी उठायी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।