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जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है आदिवासी समाज की पहचान : डॉ. रामेश्वर उरांव

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जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है आदिवासी समाज की पहचान : डॉ. रामेश्वर उरांव
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  • लोहरदगा : जिला प्रशासन द्वारा आयोजित विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम में शिरकत किए लोहरदगा विधायक डॉ रामेश्वर उरांव
  • जल, जंगल और जमीन से जुड़ी है आदिवासी समाज की पहचान : डॉ. रामेश्वर उरांव
  • विश्व आदिवासी दिवस पर लोहरदगा में आदि फेस्ट का आयोजन, जनजातीय संस्कृति और परंपरा की दिखी झलक

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन लोहरदगा की ओर से नया नगर भवन में आदि फेस्ट का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि लोहरदगा विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव ने किया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा, कला, जीवनशैली और विरासत की आकर्षक झलक देखने को मिली। स्कूली छात्र-छात्राओं ने जनजातीय संस्कृति पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी प्रकृति, परंपरा और संस्कृति से जुड़ी हुई है। जल, जंगल और जमीन आदिवासी जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने देश के विकास और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आदिवासी महापुरुषों और समाज के नायकों के संघर्ष एवं योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने बच्चों को अपने इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के बारे में जानकारी देने पर विशेष जोर दिया।

डॉ. उरांव ने कहा कि आज भी आदिवासी समाज की बड़ी आबादी की आजीविका कृषि एवं प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर है। ऐसे में किसानों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने, कृषि को मजबूत करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार काम करने की जरूरत है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त संदीप कुमार मीना ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समुदाय की संस्कृति, अधिकारों और परंपराओं के संरक्षण का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से जनजातीय समाज के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए विभिन्न योजनाओं को धरातल पर उतारने का प्रयास किया जा रहा है।

पुलिस अधीक्षक सादिक अनवर रिजवी ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराएं देश की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने लोगों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और समाज में आपसी एकजुटता बनाए रखने की अपील की।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों की ओर से स्टॉल लगाए गए, जहां जनजातीय कला, हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों एवं सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। लाभुकों के बीच विभिन्न योजनाओं के तहत परिसंपत्तियों एवं स्वीकृति पत्रों का वितरण भी किया गया।

इस अवसर पर डीडीसी राज महेश्वरम, ITDA की नीलम सोरेन एवं विधायक प्रतिनिधि निशीथ जायसवाल सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। 

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