- प्रदर्शन को एंटी-नेशनल बताने वाले आरएसएस अब जेन जेड को सबसे ईमानदार बता रहे, यह छात्रों और युवाओं की शक्ति : सांसद सुखदेव भगत
- मोहन भागवत आरक्षण का मूल अर्थ नहीं समझ रहे, इसे गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम की तरह देख रहे
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत द्वारा जेन जेड को देश की सबसे ईमानदार पीढ़ी बताए जाने और आरक्षण व्यवस्था को जारी रखने संबंधी बयान पर लोहरदगा के सांसद सुखदेव भगत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले तक प्रदर्शनकारियों को एंटी-नेशनल बताने वाले आरएसएस के नेताओं के सुर अब बदल गये हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलाव किसी दबाव का परिणाम नहीं, बल्कि छात्रों, युवाओं, लोकतांत्रिक आंदोलन और सत्य की शक्ति का प्रमाण है।
सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि मोहन भागवत ने एक ओर कहा है कि प्रदर्शन करना एंटी-नेशनल होना नहीं है, जबकि कुछ दिन पहले उन्हीं के संगठन के महासचिव की ओर से यह कहा जा रहा था कि प्रदर्शन में कुछ एंटी-नेशनल तत्व घुस गये हैं। उन्होंने कहा कि अब उसी आंदोलन से जुड़े युवाओं और जेन जेड को सबसे ईमानदार पीढ़ी बताया जा रहा है। सांसद ने कहा कि हिंदी में कहावत है- लौट के बुद्धू घर को आये। उनके शब्दों और वक्तव्य में जो यह परिवर्तन आया है, वह छात्रों और युवाओं की शक्ति का परिणाम है।
भगत ने कहा कि जिस प्रकार प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं को एंटी-नेशनल बताया गया तथा उन पर बाहरी शक्तियों से समर्थन और फंडिंग लेने जैसे आरोप लगाए गए, उसके बाद अब उसी पीढ़ी के प्रति नजरिए में बदलाव महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ताकत है। छात्रों ने अपने अधिकार और सवालों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाया और यही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है।
उन्होंने कहा कि यह छात्रों की शक्ति है, युवाओं की शक्ति है, लोकतांत्रिक व्यवस्था की शक्ति है और सबसे बढ़कर सत्य की शक्ति है, जिसके कारण विचारों में बदलाव लाना पड़ा। आरक्षण के मुद्दे पर मोहन भागवत के बयान को लेकर भी सांसद ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि आरक्षण को लेकर आज भी संविधान की मूल भावना को सही तरीके से नहीं समझा जा रहा है।
भागवत के इस कथन कि जो लोग सामाजिक और आर्थिक रूप से ऊपर उठ चुके हैं, उन्हें आरक्षण का लाभ छोड़ देना चाहिए, पर प्रतिक्रिया देते हुए भगत ने कहा कि आरक्षण को गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम के रूप में देखना ही इसकी मूल अवधारणा को गलत समझना है। उन्होंने कहा कि आरक्षण गरीबी उन्मूलन का कार्यक्रम नहीं है। आरक्षण का मूल उद्देश्य प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। इसका गरीबी से सीधा संबंध नहीं है।
संविधान में आरक्षण की जो व्यवस्था की गई है, उसका उद्देश्य वंचित और प्रतिनिधित्व से दूर रहे वर्गों को संस्थाओं और व्यवस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व देना है। सांसद ने कहा कि आरक्षण की संवैधानिक भावना को सामाजिक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर आरक्षण की अवधारणा को समझना संविधान की मूल भावना को सीमित कर देना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आरक्षण सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का माध्यम है, न कि महज गरीबी दूर करने की योजना।