जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन: छात्र प्रतिनिधिमंडल की वार्ता पर बोले जयराम महतो- बातचीत से निकले समाधान
टीम एबीएन, रांची। जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच डुमरी विधायक जयराम महतो गुरुवार को धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों का समर्थन किया। इस दौरान खास बातचीत में उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दे को लेकर विधानसभा में भी चर्चा हुई है और सरकार को आंदोलन की स्थिति से अवगत कराया गया है।
सवाल: विधानसभा सत्र के बीच आप छात्रों के बीच पहुंचे हैं, इस आंदोलन को किस रूप में देखते हैं?
जयराम महतो: आज विधानसभा में भी इस मामले को लेकर चर्चा हुई है। हालांकि आज कंडोलेंस का दिन था, इसके बावजूद मुख्यमंत्री और सरकार के अन्य मंत्रियों को धरना स्थल की स्थिति और छात्रों की मांगों के बारे में जानकारी दी गयी है। मैंने कहा है कि सरकार के प्रतिनिधिमंडल को खुद धरना स्थल पर जाकर छात्रों से मिलना चाहिए। छात्रों की मांगें जायज हैं। यह कोई आज का मामला नहीं है, लंबे समय से झारखंड के युवाओं के साथ अन्याय और ठगी होती रही है।
सवाल: छात्र आंदोलन में दो अलग-अलग मंच दिखाई दे रहे हैं। क्या इससे आंदोलन कमजोर नहीं होगा?
जयराम महतो: नहीं, ऐसा नहीं है। यह छात्रों का मामला है और सभी एक ही मुद्दे को लेकर खड़े हैं। सभी का उद्देश्य एक है। जब मुद्दा एक है तो मंच अलग होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। सभी छात्र अपने अधिकार और भविष्य के लिए लड़ रहे हैं।
सवाल: लेकिन जब एक मंच के प्रतिनिधि सरकार से वार्ता के लिए जा रहे हैं तो दूसरे मंच पर आपकी मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आप दोनों जगह क्यों नहीं जा रहे हैं?
जयराम महतो: मैं वहां भी जाऊंगा। अगर किसी मंच के प्रतिनिधि सरकार से बातचीत के लिए नहीं जा रहे हैं तो यह गंभीर विषय है। ऐसे प्रतिनिधियों को भी आत्ममंथन करने की जरूरत है कि आखिर बातचीत का रास्ता क्यों नहीं अपनाया जा रहा है। मेरा उद्देश्य किसी मंच के साथ खड़ा होना नहीं, बल्कि छात्रों की मांगों का समाधान निकालना है।
सवाल: इस समय आंदोलन में दो मंच बन चुके हैं। देखा जा रहा है कि जो जनप्रतिनिधि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के एक मंच पर आ रहे हैं, वे रविंद्र भवन चौक वाले मंच पर नहीं जा रहे। वहीं वहां पहुंचने वाले जनप्रतिनिधि भी इस मंच पर नहीं आ रहे। आप इसे किस रूप में देखते हैं?
जयराम महतो: यह अच्छी परंपरा नहीं है। अगर कोई जनप्रतिनिधि एक मंच पर छात्रों से मिलने जा रहा है तो उसे दूसरे मंच पर भी जाना चाहिए। इसी तरह इस मंच के प्रतिनिधियों को भी दूसरे मंच पर जाना चाहिए। यह गलत परिपाटी है और ऐसा नहीं होना चाहिए। आखिर दोनों जगह छात्र ही आंदोलन कर रहे हैं और उनकी मांग भी एक ही है। मंच दो हों या चार, मुद्दा एक है। ऐसे में सभी को आपसी समन्वय और एकजुटता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
छात्रों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि मंचों के बीच दूरी को। कुछ लोग है जो अपना एजेंडा चला रहे हैं लेकिन दोनों मंचों के जो छात्र हैं एक दूसरे को सम्मान कर रहे हैं कोई भी किसी के लिए अपशव्द का उपयोग नहीं कर रहे हैं यह बड़ी बात है दोनों मंच से एक ही बात उठ रही है।
सवाल: आपके मंच के प्रतिनिधियों को सरकार से वार्ता के लिए शामिल नहीं किया गया है, इस पर क्या कहेंगे?
जयराम महतो: कोई बात नहीं। हमारा उद्देश्य केवल प्रतिनिधिमंडल भेजना या वार्ता में शामिल होना नहीं है। अगर छात्र प्रतिनिधि सरकार से मिलकर बातचीत करते हैं और आंदोलन किसी सकारात्मक नतीजे के साथ खत्म होता है तो यही सबसे बड़ी बात होगी। हमारी कामना है कि छात्रों की मांगों का समाधान निकले और यह आंदोलन एक बेहतर परिणाम के साथ समाप्त हो।
जयराम महतो ने कहा कि झारखंड के युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मामले में सभी को गंभीरता दिखाने की जरूरत है। सरकार और छात्रों के बीच संवाद के जरिए जल्द समाधान निकलना चाहिए।