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आरएसएस ने सरला बिरला विवि के विशाल सभागार में किया युवा संवाद कार्यक्रम

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आरएसएस ने सरला बिरला विवि के विशाल सभागार में किया युवा संवाद कार्यक्रम
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टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची महानगर (विक्रमादित्य नगर) द्वारा सरला बिरला विश्वविद्यालय के विशाल सभागार में युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में टाटीसिलवे एवं आसपास के क्षेत्रों से एक हजार से अधिक युवा विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, अधिवक्ताओं, चिकित्सकों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों तथा व्यवसायियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम में विक्रमादित्य नगर के संघचालक माननीय शंकर साहू जी, सह संघचालक माननीय ब्रजेश जी सहित नगर के सभी दायित्ववान कार्यकर्ता एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सह-सरकार्यवाह एवं वर्तमान अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य माननीय वि. भागैया जी थे। अपने विचारोत्तेजक उद्बोधन में उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में चल रहे जनसंपर्क अभियान तथा संघ की मूल विचारधारा पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन-संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि बचपन में ही माता-पिता का साया उठ जाने और अत्यंत अभावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने राष्ट्रसेवा का मार्ग चुना। 

नौवीं कक्षा में वंदे मातरम् आंदोलन से जुड़ने के कारण उन्हें विद्यालय से निष्कासित कर दिया गया। कलकत्ता से एमबीबीएस की शिक्षा प्रथम श्रेणी में पूर्ण करने के बाद भी उन्होंने बर्मा में उच्च सरकारी पद का प्रस्ताव अस्वीकार कर अपना संपूर्ण जीवन स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने गंभीर चिंतन किया कि मुगलों और अंग्रेजों जैसे विदेशी आक्रमणकारी भारत पर शासन करने में सफल क्यों हुए। उनके अनुसार, अपनी राष्ट्रीय अस्मिता का विस्मरण, समाज का असंगठित होना तथा आंतरिक विषमताएँ ही इसकी प्रमुख कमजोरी थीं। इन्हीं कमियों को दूर कर समाज में संगठन, समरसता और राष्ट्रभाव जागृत करने के उद्देश्य से वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई।

माननीय वि. भागैया ने कहा कि भारत में भाषाओं, खान-पान, वेशभूषा और पूजा-पद्धतियों की विविधता हमारी सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है, किंतु हमारी सबसे बड़ी और मूल पहचान यह है कि हम सभी भारत माता की संतान हैं।

उन्होंने कहा कि विदेशी शासन के दौरान समाज को जाति, क्षेत्र, भाषा तथा अन्य आधारों पर विभाजित करने के सुनियोजित प्रयास किए गए। ऐसे विभाजनों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और संगठन की भावना को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।

शहीद भगत सिंह के जीवन और विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनका सपना केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि ऐसे भारत का निर्माण करना था जहाँ प्रत्येक नागरिक को समान सम्मान मिले, श्रम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक प्रतिष्ठा और आर्थिक स्वावलंबन प्राप्त हो तथा किसी भी आधार पर किसी का शोषण न हो।

उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे केवल करियर और व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का भी निर्वहन करें। वर्तमान समय में देश की एकता और अखंडता को प्रभावित करने वाले अनेक वैचारिक भ्रम और चुनौतियाँ सामने हैं। 

ऐसे समय में युवाओं को सजग, जागरूक और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित होकर कार्य करना चाहिए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। मंच पर संघ के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन के उपरांत कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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