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रॉयल्टी की अव्यवस्था का तत्काल समाधान निकाले : संजय सेठ

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रॉयल्टी की अव्यवस्था का तत्काल समाधान निकाले : संजय सेठ
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  • रॉयल्टी की अव्यवस्था से विकास कार्य ठप, सरकार तत्काल समाधान निकाले : संजय सेठ

टीम एबीएन, रांची। रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ ने रांची सहित पूरे झारखंड में रॉयल्टी व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था के कारण विकास कार्यों के ठप पड़ जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीतिगत अस्पष्टता और प्रशासनिक विफलता का खामियाजा आज आम जनता भुगत रही है। 

सेठ ने कहा कि रांची में सड़क, नाली और अन्य आधारभूत संरचना से जुड़े सैकड़ों विकास कार्य रुके हुए हैं। इन कार्यों के ठप होने का प्रमुख कारण मिट्टी, गिट्टी और बालू के परिवहन पर रॉयल्टी चालान को अनिवार्य करना है।

दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि सरकार ने यह स्पष्ट ही नहीं किया कि यह चालान जारी करने का अधिकार किस विभाग या एजेंसी के पास होगा। परिणामस्वरूप संवेदकों के सामने गंभीर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है और निर्माण सामग्री का परिवहन बाधित हो गया है। 

उन्होंने कहा कि जब सरकार स्वयं यह तय नहीं कर पा रही है कि रॉयल्टी चालान कौन जारी करेगा, तब विकास कार्यों के सुचारु संचालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि विकास के प्रति सरकार की उदासीनता को भी दर्शाता है। यह अत्यंत दुःखद है कि जिन सामग्री के लिए सरकार ने टेंडर ही नहीं किया है, उसकी रॉयल्टी मांग रही है।

सेठ ने कहा कि करोड़ों रुपये की विकास योजनाएँ अधूरी पड़ी हैं, सड़कों का निर्माण रुक गया है, नालियों का काम बंद है और इसका सीधा असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ रहा है। बरसात के मौसम में अधूरे कार्यों के कारण लोगों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि रॉयल्टी चालान जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित विभाग को तत्काल स्पष्ट किया जाए, ताकि रुके हुए विकास कार्य बिना किसी विलंब के पुनः प्रारंभ हो सकें। विकास कार्यों को प्रशासनिक भ्रम और नीतिगत असमंजस का शिकार बनाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

संजय सेठ ने कहा कि झारखंड की जनता यह जानना चाहती है कि यदि रॉयल्टी चालान अनिवार्य है तो उसे जारी कौन करेगा।सरकार को इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर देना चाहिए और तत्काल प्रभाव से ऐसी व्यवस्था लागू करनी चाहिए जिससे विकास कार्यों में आ रही बाधाएं दूर हों।

उन्होंने कहा कि जनता विकास चाहती है, अव्यवस्था नहीं। अब समय आ गया है कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाए और झारखंड के विकास को ठहराव से बाहर निकाले। 

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