- धनबाद : बीसीसीएल में खनन चालान की मंजूरी में देरी से कोयला प्रेषण पर गहराया संकट
- सीएमडी ने डीसी से मांगी मदद
एबीएन न्यूज नेटवर्क, धनबाद। बीसीसीएल में खनन चालान (माइनिंग चालान) की मंजूरी में हो रही देरी अब कोयला प्रेषण पर सीधे असर डालने लगी है।
कंपनी ने चेतावनी दी है कि यदि लंबित चालानों का तत्काल जारी नहीं किया गया तो अगले दो दिनों में प्रतिदिन करीब 25 हजार टन कोयला प्रेषण प्रभावित होगा। वहीं, चार दिनों के भीतर बीसीसीएल से सड़क और रेल मार्ग से होने वाला कोयला डिस्पैच पूरी तरह ठप पड़ सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्वयं हस्तक्षेप किया है।
उनके निर्देश पर जिला प्रशासन से तत्काल समन्वय स्थापित किया गया और उपायुक्त (डीसी) धनबाद से तत्काल हस्तक्षेप कर लंबित खनन चालानों की मंजूरी दिलाने का अनुरोध किया गया है। प्रबंधन का कहना है कि समय रहते समाधान नहीं निकला तो बिजली संयंत्रों समेत कई औद्योगिक उपभोक्ताओं को कोयले की आपूर्ति प्रभावित होगी।
इस बीच गोविंदपुर स्थित एसएलजी साइडिंग में रैक लोडिंग पूरी तरह बंद हो गई है। जिला परिवहन विभाग और खनन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 19 डंपर और कई पेलोडर जब्त किये जाने के बाद साइडिंग से कोयले का परिवहन पूरी तरह रुक गया है। इससे पहले से लंबित चालानों की समस्या और गंभीर हो गयी है।
बीसीसीएल के बिक्री विभाग के अनुसार ब्लाक-दो, लोदना और सिजुआ क्षेत्रों के बड़ी संख्या में खनन चालान विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। ब्लाक-दो क्षेत्र के 10 से 13 जुलाई के बीच के पांच आवेदन खनन निरीक्षक स्तर पर दूसरे चरण में अटके हैं। लोदना क्षेत्र के दो से 15 जुलाई के बीच के छह आवेदन जिला खनन पदाधिकारी और खनन निरीक्षक स्तर पर विभिन्न चरणों में लंबित हैं।
वहीं सिजुआ क्षेत्र के 27 जून से 15 जुलाई के बीच के 17 आवेदन अभी तक स्वीकृत नहीं हो सके हैं। इनमें छह आवेदन जिला खनन पदाधिकारी स्तर पर चौथे चरण में, 10 आवेदन प्रथम चरण में तथा एक आवेदन खनन निरीक्षक स्तर पर दूसरे चरण में लंबित है। ये सभी चालान सड़क और रेल मार्ग से कोयला परिवहन के लिए अनिवार्य हैं। इनके लंबित रहने से डिस्पैच की पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
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बीसीसीएल प्रबंधन का कहना है कि मौजूदा समय में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। यदि कोयला प्रेषण बाधित रहा तो बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार तेजी से घट सकता है, जिससे उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
इसी वजह से कंपनी ने जिला प्रशासन से लंबित मामलों का युद्धस्तर पर निपटारा कराने का आग्रह किया है। प्रबंधन का कहना है कि यदि तत्काल मंजूरी मिल जाती है तो कोयला प्रेषण सामान्य हो जाएगा और बिजली क्षेत्र सहित अन्य उद्योगों की आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने से बच जाएगी।