35 वर्षों में 1083 से अधिक लोगों की आंखों में लौटी रोशनी
टीम एबीएन, रांची। झारखंड में नेत्रदान और कॉर्निया प्रत्यारोपण के क्षेत्र में पिछले तीन दशकों से अधिक समय में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिली है। लगातार जागरूकता अभियानों, चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और समाज की भागीदारी के चलते अब तक 1083 से अधिक कॉर्नियल अंधता से पीड़ित मरीजों को सफल प्रत्यारोपण के माध्यम से नयी दृष्टि मिल चुकी है। यह उपलब्धि राज्य में नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है।
जागरूकता से बदली लोगों की सोच
करीब 35 वर्ष पहले नेत्रदान को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां और संकोच देखने को मिलते थे। धीरे-धीरे विभिन्न सामाजिक और चिकित्सा संगठनों ने जागरूकता अभियान चलाये, जिसके बाद लोगों में नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई। लगातार जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रमों का असर यह हुआ कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के लिए आगे आने लगे।
आई बैंक और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का मिला लाभ
राज्य में आई बैंक की स्थापना और कॉर्निया प्रत्यारोपण से जुड़ी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विकसित होने के बाद मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिलने लगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम और नयी तकनीकों की मदद से कॉर्निया प्रत्यारोपण सेवाओं का लगातार विस्तार हुआ, जिससे बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिला।
महामारी के दौरान भी जारी रही सेवा
कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में भी नेत्र प्रत्यारोपण से जुड़ी सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया गया। आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए कई जरूरतमंद मरीजों का सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण किया गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी सेवाओं का जारी रहना चिकित्सा व्यवस्था की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जन-जागरूकता कार्यक्रमों से बढ़ी भागीदारी
नेत्रदान के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए समय-समय पर जागरूकता रैली, रन, मैराथन, संगोष्ठी और अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि मृत्यु के बाद नेत्रदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी ला सकता है।
समाज की सहभागिता बनी सबसे बड़ी ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि नेत्रदान अभियान की सफलता केवल चिकित्सा क्षेत्र की उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी भी अहम रही है। लोगों की बढ़ती जागरूकता और स्वैच्छिक नेत्रदान की भावना के कारण राज्य में कॉर्निया प्रत्यारोपण के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लें, तो भविष्य में कॉर्नियल अंधता से पीड़ित कई और मरीजों की जिंदगी में रोशनी लौटायी जा सकती है।