सीसीएल के लापरवाही से मासूम बच्चों की मौत हुई है : देवेन्द्र नाथ महतो
मासूम बच्चों की मौत के विरोध में सीसीएल मगध माइंस बंद, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग
टीम एबीएन, रांची। हर बार की भांति इस बार भी देवेन्द्र नाथ महतो गरीबों का मसीहा बने, लातेहार जिला के बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत आरा-चमातु निवासी द्वारिका गोंझू के तीनों मासूम बच्चों—माही 9 वर्ष, दीपिका 6 वर्ष एवं आर्यन 3 वर्ष की दर्दनाक मौत से पूरे क्षेत्र में शोक एवं आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि सीसीएल मगध परियोजना प्रबंधन की लापरवाही के कारण यह दुखद घटना घटी है।
घटना के विरोध में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष एवं आंदोलनकारी नेता देवेन्द्र नाथ महतो के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण सबसे पहले मगध परियोजना के पीओ कार्यालय पहुंचे। वहां एरिया जीएम एवं प्रोजेक्ट आॅफिसर से मुलाकात कर घटना पर वार्ता करने तथा पीड़ित परिवार को न्याय, उचित मुआवजा एवं अन्य मांगों को रखने का प्रयास किया गया। लेकिन परियोजना प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गयी और न ही ग्रामीणों के साथ कोई सार्थक वार्ता की गयी।
प्रबंधन के असंवेदनशील रवैये से ग्रामीणों में भारी आक्रोश उत्पन्न हो गया। इसके बाद देवेन्द्र नाथ महतो के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सीसीएल मगध माइंस का संचालन बंद करा दिया तथा न्याय की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। देर रात तक माइंस का संचालन पूरी तरह बंद रहा और आंदोलन जारी रहा। इस दौरान देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा तीन मासूम बच्चों की मौत केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रबंधन की घोर लापरवाही का परिणाम है।
जब ग्रामीण अपनी पीड़ा और न्याय की मांग लेकर प्रबंधन के पास पहुंचे, तब उनकी बात सुनने तक का प्रयास नहीं किया गया। यह जनता के प्रति गैर-जिम्मेदाराना और असंवेदनशील रवैया है। उन्होंने आगे कहा पीड़ित परिवार को तत्काल सम्मानजनक मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार, घटना की उच्चस्तरीय जांच एवं दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाये।
साथ ही परियोजना क्षेत्र में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाये, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों। देवेन्द्र नाथ महतो ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा जब तक पीड़ित परिवार की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता और न्याय सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक सीसीएल मगध माइंस का संचालन बंद रहेगा।
यदि प्रबंधन और सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जायेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन एवं प्रशासन की होगी। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता तथा जेएलकेएम के पदाधिकारी और कार्यकर्ता देर रात तक डटे रहे और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के संकल्प को दोहराया।