टीम एबीएन, गुमला। गुमला बाईपास सड़क का निर्माण कार्य एक बार फिर कछुए की गति से हो रही है। राज्य के पहले मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी ने गुमला शहर को भीड़ से निजात दिलाने व शहरवासियों की वर्षों पुरानी मांग पर वर्ष 2000 में इसका शिलान्यास किया था। लेकिन कुछ अड़चनें आ जाने के कारण काम आरंभ हुआ और बंद हो गया था। जिसके बाद वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बाईपास सड़क निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। दो बार शिलान्यास के बाद भी बाईपास का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ। जबकि इस दौरान कई वर्ष गुजर गये। झारखंड राज्य भी पूरी तरह अपने युवा अवस्था में पहुंच गया। राज्य में कई मुख्यमंत्री आये और गये सत्ता परिवर्तन का खेल होता रहा, लेकिन नहीं बदली तो बाईपास सड़क की तस्वीर। आज भी सड़क का निर्माण कार्य चल ही रहा है। अभी भी सड़क के दो बाक्स कलवर्ट में आठ विंगवाल का निर्माण कार्य नहीं हुआ है। वहीं बीच सड़क पर पड़ने वाले पहाड़ को भी हटाया नहीं गया है। कई स्थानों पर सड़क का कालीकरण करना बाकी है। बीच सड़क से पहाड़ हटाने का काम भी काफी धीमी गति से चल रहा है। बताया जा रहा है कि फीड बेक कंपनी सड़क निर्माण कार्य की देखरेख कर रही है। लेकिन जब से कंपनी को कार्य मिला है गति और धीमा हो गया है। बाईपास सड़क निर्माण कार्य का जिम्मा मेसर्स संजय अग्रवाल कंपनी को मिली है। लेकिन कंपनी पेटीदार ठेकेदार को सड़क निर्माण कार्य दिया है। कहा जा रहा है कि कंपनी ने पेटी ठेकेदार को पैसा का आवंटन नहीं किया है। जिस कारण 15 दिनों में बनकर तैयार होने वाले बाईपास सड़क का निर्माण कार्य दिनों दिन लंबी होती जा रही है। जिसमें विभागीय लापरवाही भी सामने आ रही है। एनएच विभाग संवेदक पर दबाव नहीं बना पा रही है। यही कारण है कि सड़क का निर्माण कार्य हमेशा लटकता रहता है। विभागीय दबाव बनने पर संवेदक पेटी ठेकेदार को राशि आवंटित करता को शायद बाईपास सड़क चालू भी हो जाता। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब बाईपास सड़क का निर्माण कार्य फरवरी व मार्च के पहले सप्ताह में पूरी होने की जानकारी मिली रही है। इधर, यह बात भी छनकर सामने आ रही है कि अगर जल्द बाईपास सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं होगा तो स्थानीय लोग सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।