- स्वर्णिम कला कुंज की साहित्यिक गोष्ठी ने लोगों में जागृत की चेतना
- साहित्य समाज की धारा को पवित्र करने की क्षमता रखती है : डा रजनी शर्मा चंदा
- स्वर्णिम कला कुंज की साहित्यिक गोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न
टीम एबीएन, रांची। स्वर्णिम कला कुंज एवं साहित्योदय मंच के संयुक्त तत्वाधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन वाई बी एन स्कूल ,धुर्वा, रांची में किया गया। कार्यक्रम में मंच संस्थापक डॉ रजनी शर्मा चंदा ने आए हुए साहित्यकारों का स्वागत अभिनंदन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरिन्दर कौर नीलम ने किया। मंच पर रेनू झा रेणुका, राकेश रमन रार, नेहाल हुसैन सरैयावी, रिंकू बनर्जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दीप प्रज्वलन के पश्चात सुमधुर सरस्वती वंदना रिंकू बनर्जी के द्वारा प्रस्तुत किया गया। मंत्रोच्चारण रेनू झा रेणुका के द्वारा किया गया।
सचिन शर्मा ने कार्यक्रम का शुभारंभ कृष्ण भजन से किया जिसे सुनकर उपस्थित सभी श्रोता भाव विभोर हो गए। कार्यक्रम का संचालन पुष्पा सहाय गिन्नी एवं रुचिका रुद्राणी ने किया। विशेष अतिथि रामजी यादव ने उपस्थित सभी साहित्यकारों को साहित्य के इस समागम के लिए शुभकामनाएं दी। रामजी यादव एवं अंजू यादव के वैवाहिक वर्षगांठ की सभी साहित्यकारों ने शुभकामनाएं दी।
ऋतुराज वर्षा, आस्था शर्मा, रंजना वर्मा उन्मुक्त, रेनू बाला धार, डॉ आशीष प्रसाद, राजेश कुमार, सीमा सिन्हा मैत्री, मधुमिता साहा, रंगोली सिन्हा, सरोज गर्ग रत्न प्रभा, खुशबू बरनवाल सीपी, निर्मला सिंह, संगीता वर्मा, विभा वर्मा वाची, निर्मला कर्ण, राजश्री राज, रश्मि सिन्हा, अजित कुमार प्रसाद, सिम्मी नाथ, सुखेन्द्र यादव स्वदेशी, तारा कुमारी, मीणा बंधन आदि ने काव्य पाठ किया। अमन कुमार, चंदन कुमार ने सुमधुर गीतों की प्रस्तुति दी। रश्मि शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, संगीता शर्मा, कार्तिक अमन शर्मा, लावण्या शर्मा, यश शर्मा आदि इस सम्मेलन में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सारगर्भित अध्यक्षीय उद्बोधन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुरिन्दर कौर नीलम ने किया। स्वर्णिम कला कुंज की संस्थापक एवं साहित्योदय मंच की रांची प्रभारी डॉ रजनी शर्मा चंदा ने इस मंच के माध्यम से सृजन, संवाद, संस्कृत और सेवा हेतु सदैव समर्पित रहने के लिए समाज के प्रबुद्ध लोगों में चेतना जागृत किया।
कहा कि साहित्य समाज की धारा को पवित्र करने की क्षमता रखती है। अतः साहित्य सेवा के प्रति सजगता को अधिक से अधिक बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने युवाओं को कला, सृजन, संस्कृति और साहित्य के प्रति अपनी रुचि को जागृत करने के लिए आवाह्न किया। उपस्थित सभी वरिष्ठ साहित्यकारों को शुभकामनाएं दीं।