देश-विदेश के दिग्गज साहित्यकार हुए सम्मानित
रूप माला और स्वाति मानधना की पुस्तक का लोकार्पण
टीम एबीएन, रांची। साहित्य, संस्कृति और भाषा के उत्थान में अग्रणी राष्ट्रीय संस्था साहित्य संगम संस्थान का भव्य वार्षिकोत्सव आज संपन्न हुआ। डिजिटल और जमीनी स्तर पर साहित्य की अलख जगाने वाले इस संस्थान के वार्षिकोत्सव में देश के विभिन्न कोनों से आये नामचीन रचनाकारों, विद्वानों और भाषा-प्रेमियों ने सहभागिता दी।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी वेदानंद सरस्वती रामावतार बिंजराजका निश्छल ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद सुमधुर सरस्वती वंदना स्वाति जैसलमेरिया एवं स्वाति मानधना की प्रस्तुति से हुआ। कार्यक्रम के आरंभ में साहित्यकारों की पुस्तकों का विमोचन किया गया।
रूपा माला की पुस्तक बस दो कदम और स्वाति मानधना की पुस्तक स्वाति के मंथन मोती का भव्य लोकार्पण हुआ। इस गौरवशाली अवसर पर संस्थान द्वारा साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट रचनाकारों को राजा रंतिदेव सम्मान, साहित्य साधक सम्मान का प्रमाण पत्र एवं उत्कृष्ट विधाओं में महारत हासिल करने वाले वरिष्ठ साहित्यकारों को मानद उपाधि से अलंकृत किया गया।
उत्कृष्टता प्रमाण पत्र से नवाजे गये साहित्यकार
संस्थान की साहित्यिक गतिविधियों में निरंतर सक्रियता और श्रेष्ठ सृजन के लिए रचनाकारों को मुख्य मंच से सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया : 1. दिनेश मिश्रा, 2. सरोज शुक्ला, 3. रूपमाला सिन्हा, 4. तरुण कुमार सिंह, 5. राजीव रंजन पांडेय, 6. डॉ. प्रशांत करण, 7. डॉ भावना दीक्षित
ज्ञानश्री मानद उपाधि से विभूषित शीर्ष रचनाकार साहित्य जगत में अपने दीर्घकालीन साधना, विशिष्ट लेखन और भाषा की सेवा के लिए संस्थान की चयन समिति द्वारा देश के छह शीर्ष मूर्धन्य साहित्यकारों को सर्वोच्च मानद उपाधि से विभूषित किया गया।
सम्मानित होने वाले विभूतियों के नाम
- रामावतार बिंजराजका निश्छल
- रितेश कुमार शर्मा पथिक
- स्वाति मानधना
- स्वाति सरु जैसलमेरिया
- गणेश चंद्र केष्टवाल प्रखर
- नवीन कुमार भट्ट नीर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और संस्थान के अध्यक्ष राज वीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि दिशा दिखाने वाली मशाल भी है। आज जिन भी साधकों को सम्मानित किया गया है, उन्होंने अपनी लेखनी से समाज को वैचारिक समृद्धि दी है। वार्षिकोत्सव के अंतिम चरण में एक भव्य बहुभाषी कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया।
जिसमें देशप्रेम, श्रृंगार और समसामयिक विषयों पर उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ हुआ। सभी प्रस्तोताओं को काव्य शिरोमणि सम्मान से नवाजा गया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य संयोजक डॉ प्रशांत करण ने सभी आगंतुक अतिथियों, सम्मानित साहित्यवादियों और पटल से जुड़े दर्शकों का सहृदय आभार व्यक्त किया। शांति पाठ के साथ इस ऐतिहासिक वार्षिकोत्सव का समापन हुआ।