वीर सावरकर राष्ट्रभक्ति,साहित्य और स्वाभिमान के महान प्रतीक : संजय सर्राफ
टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, ओजस्वी साहित्यकार एवं कवि विनायक दामोदर सावरकर की जयंती प्रतिवर्ष 28 मई को मनायी जाती है।
उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में हुआ था। वीर सावरकर केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के लेखक, इतिहासकार, कवि, समाज सुधारक और दूरदर्शी विचारक भी थे।
उनकी जयंती राष्ट्रप्रेम, त्याग, साहस और स्वाभिमान की प्रेरणा देने वाला दिवस माना जाता है।वीर सावरकर ने कम उम्र में ही देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का मार्ग चुन लिया था। उन्होंने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध युवाओं में क्रांतिकारी चेतना जागृत करने के लिए अभिनव भारत संगठन की स्थापना की। बाद में वे इंग्लैंड गए, जहां उन्होंने भारत की आजादी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवाज बुलंद की।
उनकी प्रसिद्ध पुस्तक-1857 का स्वातंत्र्य समर ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नयी दिशा दी। अंग्रेज सरकार ने इस पुस्तक को प्रतिबंधित कर दिया था, क्योंकि इसमें 1857 की क्रांति को भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम बताया गया था।वीर सावरकर का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उन्हें अंग्रेजों ने दो-दो आजीवन कारावास की कठोर सजा देकर अंडमान निकोबार की सेल्युलर जेल भेज दिया था।
वहां उन्होंने अमानवीय यातनाएं सहते हुए भी अपने राष्ट्रभक्ति के संकल्प को कभी कमजोर नहीं होने दिया। जेल में रहते हुए उन्होंने अनेक कविताएं और लेख लिखे, जिन्हें साथी कैदी याद करके बाहर तक पहुंचाते थे। उनकी लेखनी में राष्ट्रप्रेम, आत्मबल और सामाजिक जागरण की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
वीर सावरकर जयंती मनाने का उद्देश्य नयी पीढ़ी को देशभक्ति, साहस, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देना है। उन्होंने जाति-पांति और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों का विरोध किया तथा हिंदू समाज में एकता पर बल दिया। वे शिक्षा, संगठन और आत्मनिर्भरता को राष्ट्र निर्माण का आधार मानते थे। उनके विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
इस जयंती का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि वीर सावरकर ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक और क्रांतिकारी दोनों स्तरों पर मजबूती प्रदान की। वे ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने अपनी लेखनी को राष्ट्र सेवा का माध्यम बनाया। उनकी कविताएं और लेख आज भी देशभक्ति की भावना को प्रज्ज्वलित करते हैं।
आज आवश्यकता है कि वीर सावरकर के जीवन, संघर्ष, साहित्य और राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरणा लेकर समाज में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सद्भाव और आत्मगौरव की भावना को मजबूत किया जाये। वीर सावरकर जयंती केवल एक महान व्यक्तित्व का स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण और कर्तव्यबोध का प्रेरणादायी पर्व है।