- जगन्नाथपुर मंदिर घटना की तीव्र निंदा, दोषियों को कड़ी सजा देने एवं आश्रितों को अति शीघ्र मुआवजा एवं सरकारी नौकरी देने की मांग : संजय सर्राफ
टीम एबीएन, रांची। झारखंड विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने झारखंड के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में हुई लूटपाट की घटना तथा मंदिर के सुरक्षा गार्ड बिरसा मुंडा की निर्मम हत्या की घटना की तीव्र शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सामाजिक शांति और सांस्कृतिक विरासत पर सीधा हमला है।
उन्होंने कहा कि झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल श्री जगन्नाथ मंदिर राज्य की ऐतिहासिक धरोहर है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे पवित्र स्थल पर अपराधियों द्वारा लूटपाट करना और सुरक्षा में तैनात गार्ड बिरसा मुंडा की हत्या कर देना अत्यंत दुखद, शर्मनाक और चिंताजनक है। इससे आम जनता में भय, रोष और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है।
उन्होंने राज्य प्रशासन एवं पुलिस विभाग से मांग की कि इस जघन्य कांड में शामिल सभी अपराधियों की अविलंब पहचान कर उन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया जाए तथा फास्ट ट्रैक न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए, ताकि भविष्य में कोई भी असामाजिक तत्व इस प्रकार की घटना करने का साहस न कर सके।
संजय सर्राफ ने मृतक गार्ड बिरसा मुंडा के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। राज्य सरकार को उनके परिजनों को सम्मानजनक आर्थिक मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा अन्य आवश्यक सहायता तत्काल उपलब्ध करानी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य में लगातार मंदिरों, धार्मिक स्थलों एवं पूजा स्थलों पर हो रही हिंसात्मक और आपराधिक घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जनता का विश्वास कानून व्यवस्था से कमजोर हो सकता है। संजय सर्राफ ने राज्य सरकार से मांग की कि श्री राधा कृष्ण प्रणामी मंदिर सहित सभी मंदिरों, आश्रमों, धर्मस्थलों एवं पूजा स्थलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
प्रमुख मंदिरों में सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्ड, रात्रि गश्ती, आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था तथा नियमित निगरानी प्रणाली लागू की जाए।उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि समाज की आस्था और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का भी विषय है। इस घटना से समस्त श्रद्धालु समाज और आमजन में गहरा आक्रोश है तथा सभी दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।