- वेशबदल के कातिल भीड़ में सबसे आगे, मोदी सरकार पर सुखदेव भगत का तीखा हमला, कहा
- महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही मोदी सरकार
- प्रधानमंत्री के संबोधन हताशा और पूर्व नियोजित राजनीतिक रणनीति से भरा हुआ
एबीएन सेंट्रल डेस्क (नई दिल्ली/लोहरदगा)। महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर तेज़ हलचल देखने को मिल रही है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार की नीयत और नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ऐसे हैं जहां भेस बदल के कातिल भीड़ में सबसे आगे खड़ा है, इशारों-इशारों में उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
सुखदेव भगत ने 2023 में लाए गए महिला आरक्षण बिल को लेकर सीधा सवाल उठाया कि अब तक इसे लागू क्यों नहीं किया गया। उनके अनुसार, यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के सम्मान और भागीदारी को लेकर गंभीर होती, तो इसे चुनावी समय में पेश करने के बजाय पहले ही लागू कर दिया जाता।
उन्होंने इस कदम को चुनावी रणनीति बताते हुए कहा कि यह बिल एक लाइव सेविंग ड्रग की तरह चुनाव को ध्यान में रखकर लाया गया, जबकि इसे चुनाव के बाद भी लाया जा सकता था। इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सराहना करते हुए कहा कि राहुल गांधी लगातार देश में महिलाओं, गरीबों और वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज़ उठाते रहे हैं।
उनके अनुसार, कांग्रेस की सोच हमेशा से महिलाओं को वास्तविक भागीदारी देने की रही है, न कि केवल चुनावी वादों तक सीमित। उन्होंने भाजपा पर यह आरोप भी लगाया कि 33 प्रतिशत आरक्षण की बात तो की जा रही है, लेकिन इसे लागू करने की कोई ठोस गारंटी नहीं दी गई है।
उनके मुताबिक, यह केवल एक राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने की कोशिश है, जिससे महिलाओं के वोट को प्रभावित किया जा सके।प्रधानमंत्री के संबोधन पर टिप्पणी करते हुए भगत ने कहा कि पूरा भाषण हताशा और पूर्व नियोजित राजनीतिक रणनीति से भरा हुआ था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस तरह के फैसले लिए गए। महिलाओं की भूमिका पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि मातृशक्ति की बात केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे जमीनी स्तर पर लागू करना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में कोई महिला प्रधानमंत्री बनती है, तो कांग्रेस उसका स्वागत करेगी। प्रधानमंत्री के लंबे कार्यकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इतने वर्षों के शासन के बावजूद महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं।
इस पूरे विवाद के बीच महिला आरक्षण बिल एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। जहां एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी हथियार करार दे रहा है। अब देखना यह होगा कि यह मुद्दा वास्तविक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ता है या फिर सियासी बहसों तक ही सीमित रह जाता है।