डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर किया भव्य कार्यक्रम
टीम एबीएन, रांची। भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर विश्व हिंदू परिषद द्वारा प्रांत कार्यालय, रांची में एक गरिमामय एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संगठन के विभिन्न पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरा वातावरण उत्साह और श्रद्धा से भर गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करने और समाज में समरसता तथा समानता के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, समर्पण और सामाजिक न्याय के लिए निरंतर प्रयास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज के समय में बाबा साहेब के विचारों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे समाज में व्याप्त भेदभाव और असमानता को समाप्त किया जा सके।
उन्होंने बताया कि समाज में भ्रांतियां फैलायी जाती है कि भीमराव अंबेडकर हिंदुत्व के विरोधी थे किंतु ऐसा नहीं था उनका पूरा नाम डॉक्टर भीमराव रामजी आंबेडकर था उनकी शिक्षा में एक ब्राह्मण परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा साथ ही साथ उन्होंने स्वयं भारत का संविधान रचना करते हुए उसके मूल प्रति में श्री राम दरबार को प्रथम पृष्ठ में स्थान दिया था।
प्रांत विद्यार्थी प्रमुख अमर प्रसाद जी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को बाबा साहेब के जीवन से प्रेरणा लेकर शिक्षा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे व्यक्ति अपने जीवन में परिवर्तन ला सकता है और समाज को भी नयी दिशा दे सकता है।
उन्होंने बताया कि डॉ. भीमराव आंबेडकर के पास कुल 32 शैक्षणिक डिग्रियां थीं, जो उन्हें अपने समय के सबसे शिक्षित भारतीयों में से एक बनाती हैं। उनके पास अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, कानून और दर्शन जैसे विभिन्न विषयों में मास्टर और डॉक्टरेट (पीएचडी, डीएससी और डीलिट) की उपाधियां थीं, जो उन्होंने भारत, अमेरिका और ब्रिटेन से प्राप्त की थीं।
कार्यक्रम में विभाग मंत्री रवि शंकर राय जी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान के माध्यम से देश को एक मजबूत आधार प्रदान किया है। उनका योगदान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के उत्थान का मार्गदर्शन करता है।
कार्यक्रम में विभिन्न नगरों से आए मंत्री एवं अध्यक्षों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। सभी ने अपने-अपने विचारों के माध्यम से बाबा साहेब के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक समरसता, राष्ट्रभक्ति और संगठन की एकजुटता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम के बाद हुई बैठक में माता सीता के अवतरण दिवस के उपलक्ष पर आगामी 25 अप्रैल से लेकर 2 मई तक पूरे प्रांत के सभी प्रखंडों में सीता नवमी मनाने का निर्णय लिया गया। अंत में सभी उपस्थित जनों ने यह संकल्प लिया कि वे डॉ. अंबेडकर के बताये मार्ग पर चलते हुए समाज में समानता, न्याय और भाईचारे की भावना को मजबूत करेंगे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक रहा, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देने वाला भी सिद्ध हुआ।