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आदिवासियों को आज तक न तो अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला और न ही संविधान प्रदत्त अधिकारों का लाभ : सुखदेव भगत

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आदिवासियों को आज तक न तो अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला और न ही संविधान प्रदत्त अधिकारों का लाभ : सुखदेव भगत
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असम में आदिवासी अधिकारों पर सियासी संग्राम, सुखदेव भगत का भाजपा पर जोरदार हमला 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। झारखंड की सियासत से उठी आवाज अब असम के चुनावी मैदान में गूंजने लगी है। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने असम पहुंचते ही भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस के स्टार प्रचारक और लोहरदगा से सांसद भगत ने अपने तूफानी दौरे की शुरूआत आक्रामक अंदाज में की। सुखदेव भगत आगामी 7 अप्रैल तक असम के विभिन्न हिस्सों में लगातार जनसभाएं और जनसंपर्क अभियान चलायेंगे। 

उनका खास फोकस आदिवासी बहुल इलाकों पर है, जहां कांग्रेस आदिवासी मतदाताओं को साधने की बड़ी रणनीति पर काम कर रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्वास सरमा पर सीधा निशाना साधते हुए भगत ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि झारखंड से दशकों पहले असम के चाय बागानों में गये लाखों आदिवासी आज भी अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 

उन्होंने आरोप लगाया कि इन आदिवासियों को आज तक न तो अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिला और न ही संविधान प्रदत्त अधिकारों का लाभ। सुखदेव भगत ने स्पष्ट किया कि इस बार कांग्रेस आदिवासी अधिकारों को चुनाव का केंद्रीय मुद्दा बनायेगी। चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासियों को उनका हक दिलाने के लिए कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेगी। 

अपने तीखे अंदाज में भगत ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि आखिर कब तक आदिवासियों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जायेगा? यह सिर्फ राजनीति नहीं, सामाजिक न्याय का सवाल है। सुखदेव भगत का यह दौरा असम की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।

आदिवासी वोट बैंक को लेकर कांग्रेस की यह सक्रियता चुनावी समीकरण बदलने की क्षमता रखती है। आने वाले दिनों में आदिवासी अधिकारों का मुद्दा असम की सियासत के केंद्र में रहने वाला है। असम में चुनावी जंग अब सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि अधिकार और पहचान की लड़ाई बनती जा रही है—जहां आदिवासी मुद्दा सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बनकर उभर रहा है।

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