- पश्चिम एशिया संकट पर पीएम को लेकर लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने किया तीखा हमला
- कहा- संबोधन संसद से ज्यादा मन की बात जैसा लगा, एकतरफा, बिना जवाबदेही और बिना संवाद के
- जनता और विपक्ष दोनों यह जानना चाहते हैं कि यदि संकट लंबा खिंचता है, तो सरकार की दीर्घकालिक योजना क्या होगी
एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। पश्चिम एशिया संकट पर संसद में दिये गये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री के भाषण को खोखला और दिशाहीन करार दिया है। सुखदेव भगत ने साफ शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री का पूरा भाषण सिर्फ उपलब्धियों का बखान था, जिसमें देश के सामने खड़ी गंभीर चुनौतियों का कोई ठोस समाधान नहीं दिखा।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह संबोधन संसद से ज्यादा मन की बात जैसा लगा, एकतरफा, बिना जवाबदेही और बिना संवाद के। उन्होंने आरोप लगाया कि जब देश एक बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट के दौर से गुजर रहा है, तब प्रधानमंत्री को स्पष्ट रणनीति पेश करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने बार-बार सिर्फ चुनौती शब्द दोहराकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। भगत ने तीखे लहजे में कहा कि अगर यह चुनौती है, तो सरकार की तैयारी क्या है? देश को यह जानने का हक है।
कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और आम जनता की जेब पर पड़ सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री ने इन अहम मुद्दों पर कोई ठोस रोडमैप नहीं रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश महंगाई और अस्थिरता की आशंका से जूझ रहा है, और सरकार सिर्फ भाषण दे रही है। सुखदेव भगत ने सरकार पर विपक्ष से बचने का भी आरोप लगाया।
उनके अनुसार, इतने गंभीर मुद्दे पर सर्वदलीय चर्चा और ठोस नीति की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने संवाद के बजाय एकतरफा बयानबाजी को चुना। उन्होंने कहा कि यह समय आत्मप्रशंसा का नहीं, बल्कि निर्णायक नेतृत्व दिखाने का है। केवल चुनौती शब्द बोलने से जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। देश को जवाब चाहिए कि तैयारी क्या है, योजना क्या है और सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस कदम उठाने जा रही है?
पश्चिम एशिया संकट को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है, जहां विपक्ष लगातार जवाबदेही और स्पष्ट रणनीति की मांग कर रहा है, वहीं सरकार अपने रुख को संतुलित और कूटनीतिक बता रही है।