- सरहुल पर राहुल गांधी का संदेश, आदिवासी संस्कृति और प्रकृति के रिश्ते को किया नमन
- झारखंड की संस्कृति में बोलना ही संगीत और चलना ही नृत्य है : सांसद सुखदेव भगत
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रकृति के पावन पर्व सरहुल के अवसर पर राहुल गांधी ने देशभर के आदिवासी समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर संदेश साझा करते हुए जल, जंगल और जमीन से आदिवासी समाज के अटूट संबंध को सम्मान दिया। अपने संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि सरहुल केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था, सम्मान और संतुलित जीवन शैली का प्रतीक है।
उन्होंने लिखा कि यह पर्व आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को पूरे देश तक पहुंचाता है। उन्होंने अपने पोस्ट में आदिवासी भाई-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि यह नववर्ष सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और नई ऊर्जा लेकर आए। साथ ही जय जोहार कहकर उन्होंने आदिवासी परंपरा और संस्कृति को सम्मान पूर्वक नमन किया। गौरतलब है कि सरहुल पर्व विशेष रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के आदिवासी इलाकों में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, जहां लोग प्रकृति की पूजा कर अच्छी फसल और खुशहाली की कामना करते हैं।
लोहरदगा लोकसभा सांसद सुखदेव भगत संसद सत्र चलने एवं असम विधानसभा चुनाव के कारण वे सरहुल में लोहरदगा नहीं आ पाए, उन्होंने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं बल्कि झारखंडी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के बीच गहरे रिश्ता का प्रतीक है। यह पर्व प्रकृति के संरक्षण व संवर्धन का संदेश देता है। श्री भगत ने कहा कि झारखंड की संस्कृति में बोलना ही संगीत और चलना ही नृत्य है। उन्होंने लोहरदगा लोकसभा के साथ-साथ झारखंड की जनता को प्रकृति पर्व सरहुल की अनेक शुभकामनाएं दी।