- प्रसिद्ध जैन संत का झारखण्ड की धरती पर भव्य अगुवानी एवं स्वागत
टीम एबीएन, रांची । जैन संत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज का झारखंड की पावन धरा पर आगमन हो चुका है। झारखंड सरकार ने उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया है, जो जैन समाज और राज्य के लिए गौरव का विषय है। मुनि श्री ससंघ छत्तीसगढ़ से होते हुए 22 मार्च 2026 को झारखंड की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं। झारखंड शासन द्वारा मुनि श्री को राजकीय अतिथि घोषित किया गया है।
इस सम्मान के लिए जैन समाज ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। मुनि श्री की यह पदयात्रा झारखंड के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल गिरिडीह (शिखरजी) की ओर अग्रसर है। राँची वासियों का प्रबल सौभाग्य है कि उन्हें आगामी 30 मार्च को महावीर जयंती एवं मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज का दीक्षा दिवस राँची में मनाने का अवसर मिला है।
आगामी 01 अप्रैल से 06 अप्रैल तक राँची में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन परम पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में ही सम्पन्न होंगे। प्रवेश के समय यह संयोग मिला कि उनकी गुरु शिष्या परम पूज्य माताजी 105 ऋजुमती माताजी ससंघ का जशपुर बिहार के दौरान सीमा पर मिलन हुआ, ज्ञात हो दोनों संघ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज से ही दीक्षित है।
झारखंड की सीमा पर बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबियों ने जयकारों और मंगल आरती के साथ गुरुदेव की अगवानी की। मुनि श्री के झारखंड प्रवास के दौरान नियमित रूप से शंका समाधान सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। मुनि श्री ने राजकीय अतिथि का दर्जा मिलने पर कहा कि यह किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी जैन श्रमण संस्कृति और परंपरा का सम्मान है।
मुनि श्री प्रमाण सागर जी का जन्म और प्रारंभिक शिक्षा झारखंड के हजारीबाग में ही हुई थी, इसलिए इस क्षेत्र के अनुयायियों में उनके आगमन को लेकर विशेष उत्साह है। अगुवानी में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों जैसे राँची, हजारीबाग, गोमिया, पारसनाथ, गुणायतन से लगभग 450 से 500 भक्त शामिल हुए।
राँची के पूरणमल सेठी, नरेन्द्र पांड्या, संजय पांड्या, अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल मंत्री जीतेन्द्र छाबड़ा सह मंत्री मनोज काला कोषाध्यक्ष प्रमोद झाँझरी चेतन पाटनी, संजय छाबड़ा,राजेश पाटोदी, संदीप दगड़ा, आदि ने विशेष भूमिका निभाई। यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।