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विभिन्न मांगों के समर्थन में 108 एंबुलेंस कर्मियों का धरना

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विभिन्न मांगों के समर्थन में 108 एंबुलेंस कर्मियों का धरना
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रांची में 108 एंबुलेंस कर्मचारियों ने वेतन कटौती और शोषण के खिलाफ किया धरना

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में 108 एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को श्रम भवन डोरंडा के सामने एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। यह धरना झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए। धरना सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चला।

कर्मचारियों का कहना है कि राज्य में 108 एंबुलेंस सेवा के हजारों कर्मचारी दिन-रात लोगों की सेवा में लगे रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। कई कर्मचारियों के वेतन में मनमाने तरीके से कटौती की जा रही है और लंबे समय से बकाया भुगतान भी नहीं किया गया है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं जैसे EPF और ESIC भी नियमों के अनुसार नहीं दी जा रही हैं।

संघ के अनुसार, फरवरी 2025 से लगातार बिना किसी स्पष्ट कारण के कर्मचारियों के वेतन में कटौती की जा रही है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों से 8 घंटे के बजाय 12 घंटे तक काम लिया जा रहा है, लेकिन इसके लिए ओवरटाइम या TA-DA का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसे श्रम कानूनों का उल्लंघन बताया गया है।

धरना दे रहे कर्मचारियों ने मांग की कि वेतन में की गई कटौती को तुरंत सुधार कर भुगतान किया जाए। 30 जुलाई 2025 को अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग की अध्यक्षता में हुए समझौते और 26 जून 2025 को संस्था के साथ हुए समझौते को लागू किया जाए। निलंबित कर्मचारियों को बहाल किया जाए और भविष्य में वेतन कटौती पर रोक लगाई जाए।

संघ ने यह भी मांग की कि श्रम विभाग के मानकों के अनुसार, EPF और ESIC की सुविधा सुनिश्चित की जाए। 8 घंटे से अधिक काम कराने पर ओवरटाइम और TA-DA का भुगतान किया जाए। साथ ही न्यूनतम वेतन के नियमों के अनुसार कुशल श्रेणी में भुगतान किया जाए। कर्मचारियों ने संस्था के भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और एंबुलेंस ऑफ रोड होने की स्थिति में भी वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष नीरज तिवारी ने कहा कि कई बार शिकायत और वार्ता के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। इसलिए कर्मचारियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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