बिना चुनाव दो संगठनों को मान्यता देने के फैसले का विरोध
टीम एबीएन, रांची। हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) में यूनियन मान्यता को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एचईसी प्रबंधन के बिना चुनाव कराये दो यूनियनों को मान्यता देने के फैसले के खिलाफ कई श्रमिक संगठन खुलकर सामने आ गये हैं। श्रमिक संगठनों ने इसे श्रमिक लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए फैसले पर कड़ा विरोध जताया है।
यूनियन नेताओं का कहना है कि अगर किसी संगठन को आधिकारिक मान्यता देनी थी तो इसके लिए पहले निष्पक्ष चुनाव कराया जाना चाहिए था। चुनाव के माध्यम से जो यूनियन श्रमिकों का बहुमत हासिल करती, उसे ही मान्यता दी जानी चाहिए थी। यूनियन नेताओं को आरोप है कि प्रबंधन ने बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के चुपचाप दो यूनियनों को रिकॉग्नाइज कर दिया, जिससे बाकी संगठनों और श्रमिकों में असंतोष बढ़ गया है।
श्रमिक नेताओं ने याद दिलाया कि एचईसी में आखिरी बार वर्ष 2015 में यूनियन चुनाव कराया गया था। ऐसे में लगभग दस साल बाद भी चुनाव नहीं कराया जाना और सीधे दो यूनियनों को मान्यता देना श्रमिक अधिकारों के साथ अन्याय है। उनका कहना है कि यूनियन चुनाव श्रमिकों के लोकतांत्रिक अधिकार का हिस्सा है। इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
एचईसी का फैसला लोकतंत्र के खिलाफ: रमाशंकर सिंह
बीएमएस के जनरल सेक्रेटरी रमाशंकर सिंह ने कहा एचईसी प्रबंधन का यह फैसला पूरी तरह से श्रमिक लोकतंत्र के खिलाफ है। यदि किसी यूनियन को मान्यता देनी है तो पहले पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव कराया जाना चाहिए। बिना चुनाव के किसी संगठन को रिकॉग्नाइज करना श्रमिकों के अधिकारों का हनन है। प्रबंधन को इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए और जल्द से जल्द यूनियन चुनाव की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए
विभिन्न यूनियनों ने प्रबंधन से मांग की है कि वह इस फैसले को वापस ले और पारदर्शी तरीके से यूनियन चुनाव कराए। चुनाव के बाद जो संगठन श्रमिकों का बहुमत प्राप्त करे, उसे ही आधिकारिक मान्यता दी जाये, ताकि संस्थान में लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम रह सके। इस मुद्दे पर हटिया प्रोजेक्ट वर्कर यूनियन, एचईसी मजदूर संघ (बीएमएस), एचईसी श्रमिक संघ और जनता मजदूर यूनियन सहित कई श्रमिक संगठन एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं। इन संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आगे आंदोलन की रणनीति भी बनाई जा सकती है।