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संसद में सरकार की कार्यशैली पर बरसे लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत

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संसद में सरकार की कार्यशैली पर बरसे लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत
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लोकतंत्र में संसद चर्चा का सबसे बड़ा मंच लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से भाग रही सरकार : सुखदेव भगत 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा/ नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में केंद्र सरकार की कार्यशैली को लेकर लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने सरकार पर तीखा और आक्रामक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है और संसद को केवल औपचारिकता बनाकर रख दिया गया है। सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि मौजूदा सरकार एस्केपिस्ट सोच के आधार पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि किसी सवाल का जवाब पहले से तय करके दे दिया जाता है और संसद में गंभीर मुद्दों पर खुली बहस से बचने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संसद चर्चा का सबसे बड़ा मंच होता है, लेकिन सरकार लगातार अपनी जिम्मेदारियों से भागती नजर आ रही है। 

सांसद ने कहा कि जब विपक्ष ने गंभीर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की मांग की, तब विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर  सदन में आए, दो बयान दिए और तुरंत बाहर चले गये। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि उस समय ऐसा लगा जैसे सांसदों को केवल सुनने के लिए बुलाया गया हो, मानो वे कोई पेड आॅडियंस हों, जबकि वे देश की जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधि हैं। 

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश इसी तरह चलाया जायेगा, जहां सरकार जवाबदेही से बचती रहे और संसद में सवाल पूछने वालों को नजरअंदाज कर दिया जाये। कांग्रेस सांसद ने कहा कि बार-बार ऐसे हालात पैदा हो रहे हैं, जहां महत्वपूर्ण मुद्दों को दबाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि जब देश के सामने बड़े संकट और अंतरराष्ट्रीय हालात पर चर्चा की जरूरत होती है, तब सरकार चर्चा से बचती नजर आती है। 

उन्होंने यह भी कहा कि क्या विपक्ष की आवाज का कोई महत्व नहीं रह गया है। सांसद ने सवाल उठाया कि क्या लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की बातों को भी अनदेखा कर दिया जायेगा। सुखदेव भगत ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना ही पड़ता है। 

अगर सरकार संसद में बहस से भागेगी और केवल बयान देकर निकल जायेगी, तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं और संसदीय मर्यादा दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की है कि संसद में उठ रहे सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर और विस्तार से चर्चा करायी जाये, ताकि देश की जनता को सच्चाई पता चल सके और लोकतंत्र की गरिमा बनी रहे।

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