Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
लाइव: 33
होम ई-पेपर देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन
झारखंड

भारत की पहचान शांति और संवाद, फिर सरकार की चुप्पी क्यों : सुखदेव भगत

शेयर करें: WhatsApp Facebook X Back to ePaper
भारत की पहचान शांति और संवाद, फिर सरकार की चुप्पी क्यों : सुखदेव भगत
विज्ञापन

विदेश नीति पर लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत का केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने भारत की विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की ऐतिहासिक कूटनीतिक पहचान शांति, संवाद और अहिंसा की रही है, लेकिन वर्तमान समय में सरकार का रुख अस्पष्ट और विरोधाभासी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से किसी भी संप्रभु राष्ट्र पर आक्रमण के खिलाफ रहा है और अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान युद्ध नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीतिक संवाद से होना चाहिए। 

सांसद भगत ने कहा कि यदि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रावधानों, विशेषकर अनुच्छेद 2(4) और 2(7), तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 को देखा जाये, तो स्पष्ट रूप से अंतरराष्ट्रीय शांति, संप्रभुता के सम्मान और संवाद की नीति को प्राथमिकता दी गयी है। उनके अनुसार वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में इन सिद्धांतों का उल्लंघन होता दिखाई दे रहा है और भारत को इस पर स्पष्ट तथा नैतिक रुख अपनाना चाहिए। 

उन्होंने भारत की विदेश नीति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के नेतृत्व में गुटनिरपेक्ष आंदोलन के माध्यम से दुनिया को संतुलित और स्वतंत्र कूटनीति का संदेश दिया था। उस दौर में भारत ने यह सिद्धांत स्थापित किया कि हर देश को अपनी सरकार चुनने और अपने आंतरिक मामलों को स्वयं संचालित करने का अधिकार है। 

सुखदेव भगत ने कहा कि विदेश नीति किसी एक दिन में तय होने वाली प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह देश की ऐतिहासिक विरासत, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और दीर्घकालिक रणनीतिक सोच पर आधारित होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज की परिस्थितियों में भारत की विदेश नीति अपने पारंपरिक मूल्यों से भटकती हुई नजर आ रही है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व को लेकर दोनों दौर के दृष्टिकोण में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। 

उनके अनुसार भारत का स्टैंड हमेशा शांति, वार्ता और अहिंसा पर आधारित रहा है, लेकिन मौजूदा समय में वह स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति बन रही है। मध्य-पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों का जिक्र करते हुए सांसद ने कहा कि इस क्षेत्र से भारत के संबंध ऐतिहासिक रूप से गहरे और प्रगाढ़ रहे हैं, इसलिए भारत को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि ईरान जैसे महत्वपूर्ण देश के प्रति उसका क्या रुख है। 

उन्होंने बिना औपचारिक युद्ध घोषणा के ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेइ की हत्या की घटना को अनुचित बताते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक व्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत हैं।सांसद भगत ने जोर देकर कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता और भारत को अपनी पारंपरिक नीति संवाद, शांति और कूटनीतिक संतुलन आदि पर मजबूती से कायम रहना चाहिए।

विज्ञापन