- श्री राधाकृष्ण प्रणामी मंदिर में फुलेरा दूज पर भक्ति एवं उल्लास का अद्भुत संगम
टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट द्वारा संचालित श्री राधा- कृष्ण प्रणामी मंदिर पुंदाग में फुलेरा दूज के पावन अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान का भव्य आयोजन किया गया। मंदिर परिसर भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रहा।
प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया और संपूर्ण वातावरण राधे-राधे के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर भगवान श्री राधा-कृष्ण का वृंदावन से आये जड़ित आभूषणों एवं मनमोहक पोशाक से अलौकिक एवं मनोहारी श्रृंगार किया गया।
रंग-बिरंगे पुष्पों से सुसज्जित दरबार की छटा देखते ही बन रही थी। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर ठाकुर जी के दर्शन किए और पुष्प अर्पित कर मंगलकामनाएं कीं। फुलेरा दूज को ब्रज में होली उत्सव के शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है, अतः मंदिर में भी फूलों की सुगंध और भक्तिमय वातावरण ने सभी को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।
मंदिर के पुजारी पंडित अरविंद पांडेय ने विधि विधान- पूर्वक पूजा-अर्चना एवं विशेष अनुष्ठान संपन्न कराया। प्रसाद में केसरिया खीर, मेवा, फल, पेड़ा, का भोग लगाया गया। तत्पश्चात भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें भक्तों ने संकीर्तन के माध्यम से प्रभु की महिमा का गुणगान किया। सामूहिक महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल ने फुलेरा दूज के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व प्रेम, सौहार्द और भक्ति का संदेश देता है तथा जीवन में सकारात्मकता और आनंद का संचार करता है। ट्रस्ट के प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने कहा कि फुलेरा दूज हमें भगवान श्री राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति भावना को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है।इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी पर पुष्पों की वर्षा की जाती है।
होली पर्व के आरंभ का यह प्रतीकात्मक दिन माना जाता है फाल्गुन मास में प्रकृति भी पुष्पों से सुसज्जित हो जाती है इसलिए उसे फूलों की दूज भी कहा जाता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, पुरुष एवं बच्चे उपस्थित थे। पूरे आयोजन ने भक्तों के मन में आस्था, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।