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बाबानगरी में महाशिवरात्रि महापर्व की तैयारी जोर-शोर से

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बाबानगरी में महाशिवरात्रि महापर्व की तैयारी जोर-शोर से
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  • महाशिवरात्रि से पहले बाबा बैद्यनाथ धाम में सदियों पुरानी परंपराओं का पालन शुरू
  • विधि-विधान से खोले जाएगें मंदिर के पंचशूल

एबीएन न्यूज नेटवर्क, देवघर। महाशिवरात्रि से पहले देवघर के प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में सदियों पुरानी परंपराओं का पालन शुरू हो गया है। इसी क्रम में शुक्रवार दोपहर बाद बाबा बैद्यनाथ और मां पार्वती मंदिर के शिखर पर लगे पंचशूल को विधि-विधान से खोला जाएगा। शनिवार को विशेष पूजा-अर्चना के बाद इन्हें फिर से मंदिर के शिखर पर स्थापित किया जाएगा।

शुक्रवार को खुलेगा पंचशूल

मंदिर परिसर के अन्य सभी मंदिरों के शिखर पर लगे पंचशूल पहले ही उतारकर उनकी सफाई की जा चुकी है। वहीं मुख्य मंदिर के शिखर पर लगे कलश की भी साफ-सफाई जारी है। तय कार्यक्रम के अनुसार, शुक्रवार दोपहर दो बजे से बाबा और मां पार्वती मंदिर के शिखर पर लगे पंचशूल को खोलने की प्रक्रिया शुरू होगी। 

सबसे पहले चिंतामणि भंडारी की अगुवाई में राजू भंडारी की टीम बाबा और मां पार्वती मंदिर के बीच बंधे पवित्र गठबंधन को खोलेगी। इसके बाद दोनों मंदिरों से पंचशूल उतारकर नीचे लाया जाएगा। परंपरा के अनुसार, बाबा और मां के पंचशूल का मिलन कराया जाएगा। इस मौके पर प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहेंगे। 

पंचशूल को भीतरखंड स्थित सरदार पंडा आवास ले जाया जाएगा, जहां सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा को पंचशूल स्पर्श कराने के बाद उसकी विधिवत सफाई की जाएगी। वहीं कुछ भंडारी बाबा मंदिर के शिखर पर लगे सवा मन सोने के कलश की सफाई करेंगे, जबकि अन्य लोग माता मंदिर के चांदी के कलश को साफ करेंगे।

गठबंधन चढ़ाने की परंपरा रहेगी बंद

परंपरा के अनुसार, पंचशूल खोलने से पहले गठबंधन खोला जाता है। जैसे ही गठबंधन खोला जाएगा, उसी समय से नया गठबंधन चढ़ाने की परंपरा अस्थायी रूप से बंद हो जाएगी। 

शनिवार को विशेष पूजा के बाद जब पंचशूल दोबारा शिखर पर स्थापित कर दिए जाएंगे, तब सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा पहला गठबंधन चढ़ाएंगे। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए गठबंधन चढ़ाने की परंपरा फिर से शुरू हो जाएगी। 

शनिवार को राधाकृष्ण मंदिर के बरामदे में आचार्य गुलाब पंडित और मंदिर महंत सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा तांत्रिक विधि से बाबा वैद्यनाथ, मां पार्वती सहित अन्य मंदिरों के उतारे गए पंचशूलों की विशेष पूजा करेंगे। इस पूजा में मंदिर उपचारक भक्तिनाथ फलहारी सहयोग करेंगे।

पूजा के बाद गणेश मंदिर से पंचशूल को दोबारा शिखर पर स्थापित करने की परंपरा शुरू होगी। महाशिवरात्रि से पहले होने वाली यह पूरी प्रक्रिया श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है।

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