बेरमो /गोमिया। साधारण व्यक्ति बिरसा मांझी (43) मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। नक्सली संगठन से उसका कोई सांठ-गांठ नहीं है। पुलिस उसे इनामी नक्सली घोषित कर रखी है। उसे सरेंडर करने का आदेश जारी हो चुका है। बिरसा नक्सली नहीं है, इसे साबित करने के लिए वह परेशान है। जब से उसे इनामी नक्सली घोषित किया गया है तब से वह डर गया है। उक्त फरियाद झारखंड जनाधिकार महासभा से मिलकर बोकारो जिला के जागेश्वर बिहार थाना क्षेत्र के चोरपनिया ग्राम निवासी बिरसा मांझी ने की। महासभा से उसने कहा कि वह नक्सली नहीं है। इसे साबित करने में उसका सहयोग किया जाए। उसकी बातों को संज्ञान में लेते हुए महासभा ने बोकारो एसपी को पत्र सौंप बिरसा पर इनामी नक्सली होने के पुलिस के आरोप को गलत बताया है। पत्र में कहा गया है कि बिरसा की स्थिति दयनीय है। वह एक आम ग्रामीण है। उसका माओवादी संगठन से कोई संबंध नहीं है। दिसंबर 2021 में जगेश्वर बिहार थाना ने उसे एक लाख का इनामी नक्सली घोषित कर सरेडंर करने का आदेश दिया था। बिरसा को पुलिस के इनामी नक्सली घोषित किए जाने के बाद उसके पिता रामेश्वर मांझी ने थाना जाकर पुलिस से गुहार लगाई थी कि नक्सली संगठन से उसके बेटे का कोई संबंध नहीं है, उसका बेटा निर्दोष है। इनामी नक्सली करार दिए जाने के बाद से वह डरा-सहमा है। इनामी नक्सली करार दिए जाने के बाद से डरा-सहमा है बिरसा ने अपने पत्र में ये भी कहा है कि वह और उसका परिवार मजदूरी कर पेट पाल रहा है। काफी जद्दोजहद कर परिवार की जिंदगी चल रही है। बिरसा का बेटा ईंट भट्ठा में मजदूरी करता है। तीन-चार वर्ष पूर्व उसके घर की कुर्की-जब्ती भी की गई थी। बिरसा को आजतक यह नहीं पता कि किस आरोप में ऐसी कार्रवाई हुई। इससे पूर्व उसे नोटिस भी नहीं मिली। महासभा ने पत्र के माध्यम से एसपी से इस मामले की जांच कर बिरसा को आरोप मुक्त करने की अपील की है। पत्र में महासभा के दिनेश कुमार मुर्मू, आलोक कुजूर, फादर टोनी, बीरालाल मुर्मू, सुखराम हांसदा, हीरालाल टुडू, अमिताभ किस्कू, रोहित ठाकुर के हस्ताक्षर भी हैं।