टीम एबीएन, रांची। स्वामी दयानंद के बताये रास्ते पर चलना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। स्वामी दयानंद जी ने अछूत उद्धार, विधवा विवाह, पाखंड खंडन, महिला शिक्षा पर जोर दिया। प्रस्तुत बातें डीएवी कपिल देव पब्लिक स्कूल कडरू के प्राचार्य सह डीएवी झारखंड जोन बी के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी श्री एमके सिन्हा ने आज स्वामी दयानंद सरस्वती जी की 203वीं जयंती के अवसर पर कही।
वे आज स्वामी दयानंद जी के जन्म दिवस पर छात्र छात्राओं को संबोधित कर रहे थे। श्री सिन्हा ने कहा कि स्वामी दयानंद जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी अपना योगदान दिया। स्वामी दयानंद जी से जब अंग्रेजों ने उनके कार्यों की प्रशंसा करने को कहा तो स्वामी दयानंद जी ने कहा कि उनकी इच्छा है कि अंग्रेज भारत छोड़कर जायें। भारत केवल भारतीयों का है। इसी प्रकार स्वामी दयानंद जी ने कुंभ के मेले में हरिद्वार में पाखंड खंडिनी पताका फहरायी थी।
श्री सिन्हा ने बताया कि स्वामी जी इतने दयालु थे कि दूध में जहर और शीशे का चूर्ण मिलाकर देने वाले रसोइये जगरनाथ को जीवन दान दिया और उसे नेपाल भाग जाने को कहा था। स्वामी जी ने कहा था- वेदों की ओर लौट चलो। प्राचार्य ने बताया कि स्वामी दयानंद जी के अवसान के बाद हंसराज जी और गुरुदत्त विद्यार्थी जैसे महापुरुषों के सहयोग से डीएवी की स्थापना हुई जिसमें वेद और अंग्रेजी दोनों का समन्वय है।
इस अवसर पर विद्यालय में एक विशेष हवन का आयोजन किया गया। हवन के बाद स्वामी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किये गये। मौके पर एस के राणा, संजय कुमार सिंह के अलावा शिक्षक शिक्षिका तथा छात्र छात्रा मौजूद थे। उक्त जानकारी डीएवी कपिल देव पब्लिक स्कूल कडरू के आलोक इंद्र गुरु ने दी।