- एक मार्च को राजधानी रांची में कुड़मी अधिकार महारैली
- हक और अधिकार के लिए आर-पार की लड़ाई का एलान
टीम एबीएन, रांची। कुड़मी समाज के हक और अधिकार को लेकर प्रस्तावित कुड़मी अधिकार महारैली अब एक मार्च को राजधानी रांची के प्रभात तारा मैदान में आयोजित की जायेगी। इसकी जानकारी शुक्रवार को स्थानीय होटल गंगा आश्रम में बृहत झारखंड कुड़मी समन्वय समिति की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में दी गई। प्रेस वार्ता की अध्यक्षता समिति के मुख्य संयोजक शीतल ओहदार ने की।
शीतल ओहदार ने बताया कि पहले यह महारैली 22 फरवरी को प्रभात तारा मैदान, धुर्वा में प्रस्तावित थी, लेकिन नगर निकाय चुनाव की घोषणा और आचार संहिता लागू होने के कारण इसे स्थगित कर एक मार्च को आयोजित करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार जानबूझकर कुड़मी समाज को संगठित होने से रोकने का प्रयास कर रही है।
प्रेस वार्ता में कहा गया कि कुड़मी समाज की मांगें पूरी तरह से जायज हैं। समाज की प्रमुख मांगों में कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करना और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाना शामिल है। शीतल ओहदार ने कहा कि 20 सितंबर को हुए रेल रोको आंदोलन के बाद सरकार घबरा गई है और इसी कारण बार-बार समाज की रैलियों को रोका जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुड़मी समाज का आंदोलन केंद्र सरकार से संबंधित है, इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा रैली की अनुमति नहीं देना समझ से परे है। 11 जनवरी को मोराबादी मैदान में सरकारी कार्यक्रम का हवाला देकर मैदान उपलब्ध नहीं कराया गया, जबकि 22 फरवरी की रैली को चुनाव आयोग के निर्देश के बाद अनुमति नहीं दी गई।
इन घटनाओं से समाज में आक्रोश व्याप्त है। शीतल ओहदार ने कुड़मी समाज के युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों और बुद्धिजीवियों से आह्वान किया कि वे एक मार्च को प्रभात तारा मैदान पहुंचकर अपने हक और अधिकार के लिए आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार रहें।
प्रेस वार्ता में सखीचंद महतो, दानिसिंह महतो, संजय लाल महतो, सुषमा महतो, अधिवक्ता मिथिलेश कुमार महतो, राजकुमार महतो, सोना लाल महतो, ज्योतिष महतो, रूपलाल महतो, खिरोधार महतो, संदीप महतो, किरण महतो और सुमन देवी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।