टीम एबीएन, रांची। मारवाड़ी भवन, हरमू रोड, रांची में झारखण्ड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन एवं मारवाड़ी सहायक समिति द्वारा आयोजित त्रि-दिवसीय मारवाड़ महोत्सव–2026 के उद्घाटन समारोह में सम्मिलित हुआ।
यह महोत्सव राजस्थान एवं मारवाड़ी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक, सामाजिक एवं पारंपरिक विरासत को झारखण्ड की धरती पर जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी विविधतापूर्ण परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ-साथ सामाजिक समरसता और आपसी सौहार्द को सुदृढ़ करते हैं।
राज्यपाल ने कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से विविध सांस्कृतिक परंपराएं, पारंपरिक वेशभूषा, व्यंजन, हस्तशिल्प कला, प्रदर्शनी और अनेक रचनात्मक गतिविधियां एक मंच पर देखने को मिल रही हैं। यह आयोजन न केवल संस्कृति को सहेजने का कार्य कर रहा है, बल्कि आपसी सौहार्द, सामाजिक समरसता और सहज नागरिकता का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि विविधता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और परोपकार से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता. मारवाड़ी समाज ने अपने आचरण और कार्यों से इस कथन को साकार किया है।
राज्यपाल ने मारवाड़ी समाज की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह समाज व्यापार, उद्योग, शिक्षा, सेवा और परोपकार के क्षेत्र में निरंतर अग्रणी रहा है। आर्थिक विकास में इसके योगदान के साथ-साथ, जहां भी मारवाड़ी समाज ने कार्य किया है, वहां स्थानीय संस्कृति के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आर्थिक सहयोग और सामाजिक सहभागिता की मिसाल पेश की है।
उन्होंने कहा कि मारवाड़ी समाज देश की एकता और सांस्कृतिक बहुलता का सशक्त प्रतीक है और यही कारण है कि यह समाज राष्ट्र की अखंडता और समरसता का उदाहरण बनकर उभरा है। मारवाड़ी महोत्सव ने संस्कृति, सौहार्द और सामाजिक चेतना को एक सूत्र में पिरोते हुए अमूल्य जीवन मूल्यों का सजीव प्रदर्शन किया।