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झारखंड

शहीद अल्बर्ट एक्का की धरती पर शैक्षणिक वन भोज

शहीद अल्बर्ट एक्का की धरती पर शैक्षणिक वन भोज
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डॉ दीपक प्रसाद  

एबीएन न्यूज नेटवर्क, गुमला। जिला अंतर्गत चैनपुर प्रखंड स्थित लावा नदी के रमणीय तट पर कार्तिक उरांव महाविद्यालय के शिक्षा संकाय के प्रशिक्षणार्थियों ने एक उल्लासपूर्ण वन भोज का आयोजन किया। मौके पर शिक्षा संकाय के दोनों सत्रों के सभी प्रशिक्षु शिक्षक-शिक्षिकाओं की सहभागिता रही। 

प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा संकाय के सभी प्राध्यापक, कोआर्डिनेटर प्रो संजय कुमार, डॉ राकेश प्रसाद, डॉ. दीपक प्रसाद, डॉ. शैलेंद्र कुमार, प्रो. राजेश रंजन, प्रो. नीलम प्रतिमा मिंज, प्रो. मंती कुमारी, डॉ रंजीत कुमार सिंह, प्रो. सरिता, प्रो अनुतलान मिज, प्रो. शिल्पी, डॉ. मनोज कुमार साहू एवं दोनों वर्षों के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। 

कल-कल बहती लावा नदी के किनारे गीत, नृत्य, वाद्य संगीत एवं जल-क्रीड़ा जैसी मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें प्रशिक्षणार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। वन भोज के दौरान सभी प्रतिभागियों के लिए स्वादिष्ट शाकाहारी एवं मांसाहारी भोजन की समुचित व्यवस्था की गयी थी। 

छात्रों और प्राध्यापकों ने एक साथ समय बिताकर इस अवसर को यादगार बनाया। उल्लेखनीय है कि यह स्थल चैनपुर प्रखंड से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित परमवीर चक्र से सम्मानित शहीद अल्बर्ट एक्का की जन्मस्थली के समीप है। यह ऐतिहासिक क्षेत्र लावा नदी और शंख नदी के संगम के लिए प्रसिद्ध है, जो चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत मनोहारी है। 

शहीद अल्बर्ट एक्का भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 में वीरगति को प्राप्त हुए थे। उन्होंने देश की रक्षा के लिए अद्वितीय साहस और बलिदान का परिचय दिया। इस ऐतिहासिक स्थल पर पहुंचकर सभी छात्र-छात्राओं एवं प्राध्यापकों ने शहीद अल्बर्ट एक्का को नमन किया और उनके बलिदान को स्मरण किया। यह वन भोज न केवल मनोरंजन का अवसर रहा, बल्कि विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रभक्ति, इतिहास और प्रकृति से जुड़ने का एक प्रेरणादायक अनुभव भी सिद्ध हुआ। 

इसे एजुकेशनल टूर के रूप में आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत इसका उद्देश्य भावी शिक्षकों को प्रबंधन कौशल, टीम वर्क, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, समय प्रबंधन तथा सामूहिक उत्तरदायित्व का व्यावहारिक अनुभव कराना था। इसके साथ ही यह भ्रमण प्रशिक्षणार्थियों को प्रकृति शिक्षा, स्थानीय संस्कृति, सामाजिक रीति-रिवाजों एवं ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बना।

प्राकृतिक परिवेश में सीखने की यह प्रक्रिया कक्षा शिक्षण से अलग हटकर अनुभवात्मक शिक्षा का उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिससे प्रशिक्षणार्थियों में संवेदनशीलता, सामाजिक समझ और राष्ट्रभाव का विकास होता है। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सीमा ने इस अवसर पर प्रशिक्षणार्थियों को वन भोज एवं शैक्षणिक भ्रमण के लिए उत्साहित करते हुए अपनी शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, सामाजिक समझ और अनुभवात्मक शिक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं।

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