बेरमो/ललपनिया। अक्टूबर में साड़म के कुछ ग्रामीणों के आवेदन पर राजस्व अंचल निरीक्षक गोमिया की जांच से इस बात का उद्भेदन हुआ है कि साड़म बाजार के हौसीर मौजा वाले हिस्से में बुधबजार लगा करता था, जो अतिक्रमण कारण विलुप्त हो गया है। सर्किल इंस्पेक्टर लालमोहन दास के जांच प्रतिवेदन के आधार पर सीओ गोमिया ने संबंधित अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिया है। उपर्युक्त जानकारी देते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य कार्य समिति के सदस्य एवं झारखंड आंदोलनकारी इफ्तेखार महमूद ने कहा है कि साड़म बाजार क्षेत्र के अंतर्गत मौजा होसिर, खाता नं 458 प्लॉट नंबर 4711 में 1.65 एकड वं प्लोट नंबर 4512 में 9 डिसमील कूल एक एकड 74 डिसमील जमीन जो सैरात की जमीन है, पर बुधबाजार लगने का इतिहास रहा है। इस बात का उल्लेख खतियान में भी है। वर्ष 1970 ई पूर्व तक सरकार के द्वारा बाजार का डाक भी होते रहा है और सरकार को राजस्व भी मिलते रही है। सरकार के द्वारा बाजारों का डाक बंद होने के बाद उक्त बाजार पर से सरकार का प्रशासनिक ध्यान खत्म हो गया और तब उक्त बाजार के पूरे भू-भाग को समाज के ध्रुत लोगों के द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है।अंचल निरीक्षक के प्रतिवेदन में उपर्युक्त भूमि सैरात की है। महमूद ने कहा कि अतिक्रमणकारियों के द्वारा हुकुमनामा को आधार बनाकर बुध बाजार के भू-भाग पर अपना दखल को कानून सम्मत ठहराने की कोशिश हो रही है, किंतु जमी दारी प्रथा उन्मूलन बादभी बाजार का डाक होते रहा है वर्ष 1951 में साडम निवासी कालाचंद दे नामक व्यक्ति ने बाजारका डाक भी लिया था,तो ऐसी स्थिति में जमी दारी उन्मूलन पूर्व की तिथि से उल्लेखित गैर निबंधित हुकुमनामा श्वत:प्रभावहीन हो जाती है।उन्होंने कहाकि ऐसे भी अनूप मुखर्जी के प्रतिवेदन के आलोक में गैर निबंधित हुकुमनामा राजस्व विभाग में मान्य नहीं है। अतिक्रमणकारियों ने बुधबाजार के स्वरूप को बिल्कुल बदल दिया है और स्थाई संरचना का निर्माण कर पूरे भू-भाग पर अतिक्रमण कर लिया गया है। उन्होने लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम 1956 के सुसंगत प्रावधान का उपयोग कर अतिक्रमण को शीघ्र हटाने की मांग की है।