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छठ महापर्व के लिए बेहद प्रसिद्ध है नगरी का कुआं...

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छठ महापर्व के लिए बेहद प्रसिद्ध है नगरी का कुआं...
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  • रांची की इस जगह छठ पर दूर-दूर से क्यों आते हैं लोग
  • नगरी गांव में किसने स्थापित किया था कुआं, जानें क्या है मान्यता

टीम एबीएन, रांची। सूर्य उपासना का महापर्व छठ को लेकर झारखंड में भी काफी उत्साह रहता है। यहां के घाटों पर भक्तों का सैलाब उमड़ता है। इतना ही नहीं जमशेदपुर के डोमुहानी घाट में स्वर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम स्थल डोमुहानी पर छठ की विशेष रौनक देखने को मिलती है। 

नदी के किनारों पर की गई सजावट लोगों का मन मोह लेती है। राजधानी रांची में भी भक्त उत्साह से भरे रहते हैं। इस बार यह पर्व 25 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू हो रहा है। 27 को संध्या अर्घ्य और 28 अक्टूबर को प्रातः: अर्घ्य दिया जाएगा।

सूर्य कुंड में डुबकी लगाने से होती है कई बीमारियां ठीक

रांची में छठ के लिए तैयारी जोरों पर है। रांची में एक जगह सूर्य कुंड है। कहा जाता है कि सूर्य भगवान की उपासना भगवान राम ने की थी। इसलिए छठ के समय दूर-दूर से लोग इस घाट में खासतौर पर छठ का अर्घ्य देने के लिए आते हैं। 

बता दें कि रांची के सूर्य मंदिर के ठीक पीछे बड़ा सा एक तालाब है जिसे सूर्य कुंड कहा जाता है। मान्यता ये भी है कि यहां डुबकी लगाने से कई सारी बीमारी ठीक हो जाती है। सूर्य कुंड पर संतान की प्राप्ति के लिए लोग मन्नत भी मांगते हैं।

अर्जुन ने बाण मारकर प्रकट किया था कुआं

वहीं, रांची की नगरी गांव में एक कुआं है। कहा जाता है कि यह वही गांव है जहां पर महाभारत काल में पांडव घूमते हुए आए थे और कुछ समय व्यतीत किया था। यहां मौजूद कुआं अर्जुन ने बाण मारकर प्रकट किया था और इसके बाद इसी कुएं के पानी से द्रौपदी सूर्य भगवान को अर्घ्य देती थी। 

आज भी लोग इस कुआं को देवी समान मानते हैं। मान्यता है कि यहां पर देवी के दर्शन होते हैं। कहा जाता है कि कुआ में एक देवी भी रहती है। इसीलिए लोग इसकी पूजा करते हैं। छठ के समय इसी के पानी से अर्घ्य देना और पानी से घर की साफ सफाई होती है।

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