टीम एबीएन, रांची। रांची शहर में 2018 के बाद नगर निगम का चुनाव नहीं हुआ है। इस बीच राज्य सरकार अफसरों के द्वारा रांची शहर चला रहे हैं। शहर की सरकार चलाने की जो लोकशाही व्यवस्था है उसे नौकरशाही या अफसरशाही बना दिया गया है। इस बीच केन्द्र सरकार के द्वारा जो जनप्रतिनिधियों को दी जाने वाली राशि है उसमें लगभग 1600 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान रांची समेत पूरे झारखंड को हो चुका है।
रांची शहर कुड़ेदान में है। रांची शहर की जनता गली मोहल्ले में जहां तहां जल जमाव और गड्ढे में गिर रही है। चारों तरफ मच्छर और गंदगी के अंबार से बच्चों से लेकर बड़े तक बीमार हो रहे हैं। जहां तहां स्ट्रीट लाइट खराब है जिससे चोर उचक्कों छिनतई छेड़छाड़ और नशा तथा अपराध करने वालों को पूरा माहौल और मौका मिल रहा है।
जनता के लिए असुरक्षित वातावरण है। शुद्ध पीने का पानी तक नियमित रूप से उपलब्ध नहीं है। यह सब तब हो रहा है जब आम जनता नगर निगम को होल्डिंग, वाटर से लेकर विभिन्न प्रकार के टैक्स दे रही है। मतलब हमसे पैसे भी लिए जा रहे हैं और हमें जरूरी नागरिक सुविधाओं और सुरक्षा से भी वंचित किया जा रहा है।
रांची शहरवासी राजधानी बनने के बाद से ही लगातार सड़क जाम से परेशान हैं। पार्किंग तथा फुटपाथ की नियोजित व्यवस्था नहीं होने से पैदल चलने वालों से लेकर वाहन चलाने वाले यहां तक कि सड़क किनारे रोजी रोजगार करने वाले फुटपाथ दुकानदार भी परेशान हैं। जबकि यदि ढृढ इच्छा शक्ति हो तो सबकुछ व्यवस्थित हो सकता है।
इसलिए जरूरी है कि जल्द से जल्द सरकार रांची शहर समेत सभी शहरी निकायों में चुनाव कराए तथा जनता को जनप्रतिनिधियों को चुनकर उनसे अपने समस्याओं के समाधान का रास्ता दे। इसके लिए हम रांची शहर के सभी वार्ड के प्रतिनिधियों/ समाजसेवियों तथा जागरूक नागरिकों की एक बैठक 5 अक्टूबर दिन रविवार को दिन में 11 बजे से मोराबादी मैदान स्थित बापू वाटिका के समीप आयोजित करने जा रहे हैं। उक्त जानकारी रांची शहर नागरिक मंच के अध्यक्ष अमृतेश पाठक (95461 51078) ने दी।