टीम एबीएन, श्वेताम्बर जैन मंदिर, डोरंडा (रांची)। जैन मंदिर डोरंडा मे श्री श्वेताम्बर जैन मंदिर डोरंडा मे सुबह भगवान की प्रक्षाल पूजा, अभिषेक एवं स्नात्र पूजा बहुत ही हर्ष आनंद एवं उल्लास से सम्पन्न हुई!तत्पश्चात स्वध्यायी श्री जिनांग धीरेन साह एवं हर्षिल सुरेश साह द्वारा आज कल्प सूत्र वांचन में आगे के पाठ में श्रद्धालुओं को बताया गया!
पर्युषण पर्व अपनी पूर्णाहुति की ओर अग्रसर है। आज सातवां दिन था और कल अंतिम दिन क्षमापना हैं! 84 लाख जीवयोनियो से क्षमायाचना की जायेगी. हर जैनी का कर्तव्य होता है कि सालभर में जो भी अपनी गलतियां की होती है. उसके लिये इस दिन क्षमायाचना करें!
भगवान महावीर के जीवन के बारे में आगे बताते हुए कहा कि भगवान महावीर के जीवन से हमें ये जानने को मिलता है कि वे हर परिस्थिति में समभाव रहे एवं उन्होंने कोई प्रतिकार नही किया! उनके मन में कोई दुर्भाव नहीं आया. भगवान महावीर के यही आदर्श उन्हें मनुष्य से भगवान बनाती है। जैन धर्म की स्थापना भगवान आदिनाथ श्री ऋषभ देव जी ने की थी!आगे भगवान आदिनाथ के बारे में बताते हुए कहा की भगवान् श्री ऋषभ देव प्रथम तीर्थकर, प्रथम साधु थे!
भगवान आदिनाथ के समय में मनुष्यों को अपनी जरूरत की सारी चीजें कल्पवृक्ष से प्राप्त होती थी लेकिन धीरे-धीर कल्पवृक्ष की क्षमता घटने लगी थी तब भगवान ने अपनी पुत्री ब्राह्मी सुन्दरी को स्त्रियों की 64 कलाएँ सिखाई व असि, मसी व कृषि का आरंभ हुआ. हमारे भारत देश का नाम आदिनाथ भगवान के पुत्र भरत (चक्रवर्ती सम्राट) के नाम पर भारत हुआ हैं!
आज के प्रवचन में मुख्य रूप से संपत लाल रामपुरिया, राजकुमार, नवीन , चंपालाल रामपुरिया, रोहित कोचर, प्रकाश पारख,श्रीलाल सेठिया, पुष्पा देवी, सुशीला देवी,सरोज सेठिया, उर्मिला सेठिया,उषा कोठारी,शशी कोठारी आदि के साथ श्रद्धालुओं की अच्छी उपस्थिति थी!