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पर्यूषण पर्व का सातवाँ दिन आज ध्यान दिवस के रूप मे मनाया गया

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पर्यूषण पर्व का सातवाँ दिन आज ध्यान दिवस के रूप मे मनाया गया
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  • साधना के क्षेत्र में ध्यान का बड़ा महत्व : सीमा डुंगरवाल

टीम एबीएन, रांची। जैन श्वेतांबर तेरापंथ संघ का पर्यूषण पर्व के सातवें दिन उपासिका सीमा डुंगरवाल ने कहा कि पर्यूषण पर्व आत्म साधना का पर्व है।पर्यूषण का प्रत्येक दिन साधना की एक-एक सीढ़ी से चढ़ते हुए व्यक्ति मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। ध्यान दिवस व्यक्ति को सिखाता है अंतर्मन की यात्रा करना। 

व्यक्ति बाह्य जगत को भली भांति से जानता एवं पहचानता है। लेकिन अपने अंतर जगत को जानने का एकमात्र साधन है ध्यान। 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने अपनी साधना काल के साढ़े 12 वर्ष में अधिकतम समय ध्यान में ही व्यतीत किया। तेरापंथ धर्म संघ की दशवें आचार्य महाप्रज्ञ जी ने ध्यान को एक नया रूप दिया जो प्रेक्षा ध्यान के रूप में माना गया। आज देश-विदेश के  लोग इसे अपनाकर अपने जीवन को एक नया मोड़ दे रहे हैं। 

व्यक्ति त्याग तपस्या के द्वारा अपने इंद्रिय मन और चित्त को  संयमित करते हुए अपनी आत्मा के निकट जाने का प्रयास करता है। आत्मा के निकट जाने के लिए व्यक्ति के द्वारा गृहीत किए हुए व्रत, जप और ध्यान उसे परमात्मा में लीन होने का मार्ग अग्रसर करता है, ऐसी ही कला को सिखाता है ध्यान दिवस। वहीं उपासिका संतोष श्रीमाल ने श्रावक समाज को संबोधित करते हुए कहा कि पयूर्षण पर्व का ये सातवां दिन ध्यान दिवस निष्पत्ति एवं उपसंहार के रूप में है।

साधु-साध्वी या कोई साधक भी ध्यान रूपी जड़ी-बूटी के बिना खड़ा नहीं रह सकता है। शरीर अलग है। आत्मा अलग है। इस भिन्नता को समझ कर ही अंतर्मन की यात्रा करना ध्यान है!  मन को साधना बहुत आवश्यक होता है, क्योंकि यह मन ही मनुष्य के कर्मबंध का कारण एवं मोक्ष का भी कारण हो सकता है। मन, वचन, काया की प्रवृत्ति का निरोध करना और एक बिंदु पर एकाग्र होना ही ध्यान है। 

ध्यान दो प्रकार से किया जा सकता है सालंबन और निरालंबन। विश्व में आविष्कार करने वाले बहुत मिल जाते हैं। कुछ भौतिक आविष्कार करते हैं और कुछ भीतर का आविष्कार। ध्यान करने वाला व्यक्ति ही अपनी मंजिल का वरण कर सकता है। ध्यान हमारी चंचलता को कम करता है।  ध्यान के प्रयोग से मन की एकाग्रता बढ़ती है एवं वाणी में निर्मलता आती है। 

शरीर में जो स्थान मस्तिष्क का है और वृक्ष में मूल का जो महत्व है वही महत्व धर्म के क्षेत्र में ध्यान का है। मन की एकाग्रता के लिए तन की स्थिरता बहुत जरूरी होती है। तपस्वीयों की तपस्या गतिमान है जिनमें विशाल दस्सानी के आज 27 उपवास है उनका पारणा  तेरापंथ धर्म संघ के आचार्य श्री महाश्रमण जी के सानिध्य में अहमदाबाद में करने का भाव है।

आचार्य श्री का चतुर्मास अभी अहमदाबाद में चल रहा है!साथ साथ रूबी बांठिया के 7, रश्मि सिंघी 6,एवं विकाश नाहटा के आज 8 उपवास है सभी का आगे बढ़ने का भाव हैं। कल सम्वतसरी महापर्व हैं इस अवसर पर कल सभी श्रावकों का उपवास रहेगा एवं भवन में दिनभर धार्मिक गतिविधिया जारी रहेगी एवं शाम को सामूहिक प्रतिक्रमण होगा।

आज के प्रवचन में जानकी दास बोहरा,जय पींचा, अरुणा बोथरा,पुष्पा सुराणा, सुरेश जैन, शवेता गुलगुलिया, कोमल गेलड़ा, दिलीप भटेरा,अमित जैन, विकास सिंघी, कमलेश संचेती सहित, विकाश सुराणा, आकाश बैंगानी आदि के साथ अच्छी संख्या में श्रावक उपस्थित थे। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी सुरेश जैन ने दी।

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