Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
लाइव: 214
होम ई-पेपर देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन
झारखंड

वाराणसी के काल भैरव भी पहनते हैं पुलिस की वर्दी

शेयर करें: WhatsApp Facebook X Back to ePaper
वाराणसी के काल भैरव भी पहनते हैं पुलिस की वर्दी
विज्ञापन

भारत का अनोखा मंदिर जहां भगवान भी पहनते हैं पुलिस की वर्दी, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान 

एबीएन सोशल डेस्क। भारत में मंदिरों की परंपराएं और मान्यताएं अक्सर लोगों को हैरान कर देती हैं। हर मंदिर का अपना इतिहास और महत्व होता है। वाराणसी में स्थित बाबा काल भैरव मंदिर भी ऐसा ही एक स्थल है, जो अपनी खास परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां भगवान काल भैरव को पुलिस की वर्दी पहनायी जाती है। 

काशी के कोतवाल माने जाते हैं बाबा काल भैरव 

वाराणसी, जिसे काशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। यहां भगवान शिव के 12 ज्योतिलिंर्गों में से एक काशी विश्वनाथ मंदिर स्थित है। बाबा काल भैरव का मंदिर भी यहीं है और उन्हें काशी का कोतवाल यानी रक्षक माना जाता है। मान्यता है कि काशी आने वाले हर व्यक्ति को उनकी अनुमति लेनी होती है और वे ही शहर की रक्षा करते हैं। 

पुलिस वर्दी पहनाने की परंपरा कैसे शुरू हुई? 

कोरोना महामारी के समय, जब पूरा देश संकट से जूझ रहा था, वाराणसी के लोगों ने बाबा काल भैरव से शहर की रक्षा की प्रार्थना की। इसी दौरान मंदिर के पुजारियों और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर एक अनोखा निर्णय लिया, बाबा को पुलिस की वर्दी पहनायी जाये। इसका उद्देश्य था शहर की सुरक्षा का प्रतीक बनाना और पुलिस कर्मियों के कठिन परिश्रम का सम्मान करना। इस वर्दी में पुलिस की टोपी, छाती पर बिल्ला, बायें हाथ में चांदी का डंडा और पूरी वर्दी शामिल होती है। 

भीड़ उमड़ती है बाबा के इस रूप को देखने 

जब भी बाबा को पुलिस की वर्दी पहनायी जाती है, मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। स्थानीय मान्यता है कि बाबा काल भैरव हर बुरे काम करने वालों को दंड देते हैं और अच्छे कार्य करने वालों की रक्षा करते हैं। उन्हें काशी के पाप-पुण्य का हिसाब रखने वाला भी माना जाता है। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से भक्त वाराणसी पहुंचते हैं।

विज्ञापन