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भाई-बहन के अटूट प्रेम का पावन पर्व रक्षाबंधन 9 अगस्त को

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भाई-बहन के अटूट प्रेम का पावन पर्व रक्षाबंधन 9 अगस्त को
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  • रक्षाबंधन केवल धागे का एक बंधन नहीं,बल्कि संवेदना, विश्वास,श्रद्धा और कर्तव्य का है प्रतीक : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि इस वर्ष रक्षाबंधन पर 9 अगस्त को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन बहन के स्नेह, सुरक्षा और विश्वास का पर्व है। जिसमें बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध कर उनकी दीर्घायु, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। इस वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त शुक्रवार को दोपहर 2 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी। 

तिथि का समापन 9 अगस्त शनिवार को दोपहर 1 बजकर 24 मिनट पर है। उदया तिथि के अनुसार 9 अगस्त को रक्षाबंधन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि है, जिसे राखी पूर्णिमा भी कहा जाता है। भारत एक सांस्कृतिक विविधताओं से भरापूरा देश है जहाँ हर त्योहार अपने आप में एक विशेष संदेश लेकर आता है। इन्हीं में से एक है रक्षाबंधन, जो भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और रक्षा के वचन का प्रतीक है। 

यह पर्व न केवल पारिवारिक संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक एकता और प्रेम का संदेश भी देता है। रक्षाबंधन का अर्थ है रक्षा का बंधन। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बाँधती हैं और उनके दीर्घायु, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई जीवनभर अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है और उसे उपहार देता है। यह पर्व केवल खून के रिश्तों तक सीमित नहीं है। 

कई स्थानों पर महिलाएं अपने पड़ोसी, मित्र या सैनिकों की कलाई पर भी राखी बाँधती हैं, जिससे यह पर्व सामाजिक समरसता और भाईचारे का प्रतीक बन गया है। रक्षाबंधन का उल्लेख कई पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। एक कथा के अनुसार जब भगवान विष्णु ने राक्षस बलि से वचनबद्ध होकर बैकुंठ छोड़ दिया था, तब माता लक्ष्मी ने बलि को राखी बाँधकर उसे अपना भाई बनाया और विष्णु को वापस ले आईं। 

महाभारत में भी इसका उल्लेख मिलता है जब द्रौपदी ने श्रीकृष्ण के हाथ से खून बहते देखकर अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़कर उनके हाथ में बाँध दिया। श्रीकृष्ण ने तब यह वचन दिया था कि वह हमेशा द्रौपदी की रक्षा करेंगे।आज के दौर में रक्षाबंधन न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में बसे भारतीयों द्वारा भी धूमधाम से मनाया जाता है। डिजिटल युग में बहनें डाक या ऑनलाइन माध्यमों से भी अपने भाइयों को राखी भेजती हैं। 

वहीं, भाई भी उपहार और शुभकामनाएं भेजकर इस रिश्ते को जीवंत बनाए रखते हैं।रक्षाबंधन केवल एक परंपरा नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक दायित्व है जो समाज को जोड़ता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि प्रेम, सुरक्षा और विश्वास के धागे रिश्तों को मजबूत बनाते हैं। इसके साथ ही यह हमें नारी सम्मान, परिवारिक एकता और सामाजिक सद्भाव की प्रेरणा भी देता है।

रक्षाबंधन केवल धागे का एक बंधन नहीं, बल्कि संवेदना, श्रद्धा और कर्तव्य का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपने कर्तव्यों की याद दिलाता है और यह विश्वास जगाता है कि रिश्तों की डोर सच्चाई और प्रेम से बनी होती है। ऐसे पावन अवसरों पर हमें अपने परिवार और समाज को और भी सुदृढ़ करने का संकल्प लेना चाहिए।

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