विश्व आदिवासी दिवस पर बॉलीवुड नहीं, झारखंड के आदिवासी कलाकारों को मिले मंच: झारखंड कलाकार आंदोलन संघर्ष समित्ति ने आइपीआरडी को सौंपा ज्ञापन
टीम एबीएन, रांची। झारखंड कलाकार आंदोलन संघर्ष समित्ति ने आज सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (आइपीआरडी), झारखंड सरकार को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें विश्व आदिवासी दिवस समारोह में स्थानीय आदिवासी कलाकारों की अनदेखी और बॉलीवुड कलाकारों को बुलाए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया गया है।
झारखंड कलाकार आंदोलन संघर्ष समित्ति ने मांग
- झारखंड की सभी 32 आदिवासी जनजातियों को मंच प्रदान किया जाए।
- हर जनजाति की संस्कृति, गीत, संगीत, वेशभूषा और परंपरा को प्रदर्शित करने का अवसर मिले।
- जो आदिवासी समाज के लोग शिक्षा, कला, खेल, प्रशासन, विज्ञान आदि क्षेत्रों में विशेष उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं, उन्हें सम्मानित किया जाए।
- झारखंड राज्य के वैसे कलाकार जो आदिवासी समूह से नहीं हैं लेकिन आदिवासी गीत, संगीत और नृत्य का प्रतिनिधित्वा करते हैं उन्हे भी मंच प्रदान किया जाये।
- झारखंड राज्य के 24 जिलों के आदिवासी समुदाय को इस कार्यक्रम में प्रतिनिधित्वा करने का मौका दिया जाये। जिससे की ये सिर्फ रांची का कार्यक्रम न हो कर पूरे राज्य का कार्यक्रम बन पाये।
- इससे यह दिवस मात्र एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रेरणा स्त्रोत बनेगा।
- झारखण्ड कलाकार आंदोलन संघर्ष समित्ति ने इस पत्र में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 और 51ए(एफ) के साथ-साथ एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम का भी हवाला देते हुए कहा है कि आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक उपेक्षा संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के खिलाफ है।
झारखंड कलाकार आंदोलन संघर्ष समित्ति का कहना है कि बॉलीवुड कलाकार न तो झारखंड के आदिवासी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, न ही वे उनकी संस्कृति से जुड़े हैं। ऐसे में उनका मंचन केवल बाजारवाद और दिखावे का प्रतीक है, जो विश्व आदिवासी दिवस की आत्मा के खिलाफ है।
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जैसे ही यह बात आदिवासी युवाओं और सांस्कृतिक समूहों तक पहुँची, समाज में भारी आक्रोश देखने को मिला। फेडरेशन ने विभाग को चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय के कारण कोई सामाजिक असंतोष या अवांछनीय परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो उसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।