- युवाओं का फूटा आक्रोश, छात्र संघ ने पूर्व सीएम चंपई से मिलकर दी विधानसभा घेराव की चेतावनी
टीम एबीएन, रांची। झारखंड के लाखों युवाओं के सब्र का बांध अब टूट चुका है। पिछले 9 वर्षों से जिस झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) का इंतज़ार करते-करते हजारों सपने मुरझा गए, उस पर अब एक निर्णायक संग्राम छिड़ गया है।
छात्रों की इस लंबी पीड़ा को आवाज़ देने के लिए छात्र युवा अधिकार संघ, रांची ने मोर्चा संभाल लिया है। संघ ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन से मिलकर न केवल ज्ञापन सौंपा, बल्कि यह साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द कोई कदम नहीं उठाया, तो इस बार झारखंड का हर एक युवा विधानसभा के घेराव के लिए तैयार है।
यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं का भविष्य है। संघ के सदस्यों ने बताया कि हजारों छात्र शिक्षा स्नातक (बीएड) और प्रारंभिक शिक्षा में डिप्लोमा (डीएलएड) जैसे शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरे कर चुके हैं, लेकिन 2016 के बाद से कोई जेटेट परीक्षा नहीं हुई।
यह देरी न केवल राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन है, बल्कि संविधान द्वारा दिए गए समान अवसर के अधिकार पर भी सीधा हमला है। लाखों युवाओं की उम्मीदों पर तब और गहरी चोट लगी, जब 3.5 लाख से अधिक आवेदकों के बावजूद सरकार ने बिना किसी स्पष्ट कारण के जेटेट का विज्ञापन वापस ले लिया।
इस एक फैसले ने युवाओं के मन में निराशा और आक्रोश भर दिया, लेकिन अब यही निराशा एक नए आंदोलन को जन्म दे रही है। संघ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस बीच कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो मानसून सत्र में विधानसभा का घेराव कर सरकार को उसकी ज़िम्मेदारी का एहसास कराया जाएगा।
यह आंदोलन सिर्फ जेटेट परीक्षा को आयोजित करने की मांग नहीं है, बल्कि यह उन लाखों युवाओं की आवाज़ है, जो पिछले 9 वर्षों से सिर्फ एक अवसर का इंतज़ार कर रहे हैं। यह उनकी लड़ाई है और वे इसे तब तक नहीं छोड़ेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।